थरूर ने अपने संदेश में लिखा कि सौ बार जन्म लेंगे तो सौ बार करेंगे, जी भर के अपने वतन से प्यार करेंगे। जो हमसे बन पड़ा, अ वतन हमने किया है जो सच था, सारी दुनिया ने अब जान लिया है। उन्होंने आगे लिखा कि समस्त सदस्यों की ओर से मातृभूमि और देश-विदेश में हिंदुस्तान प्रेमियों का आभार, जिन्होंने हमारी बात को ध्यान से सुना और दिल से स्वीकार किया। हम अहिंसा प्रेमी हैं, लेकिन तब तक, जब तक कोई... जय हिंद।
यह प्रतिनिधिमंडल उन सात भारतीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक था, जिन्हें भारत सरकार ने 33 वैश्विक राजधानियों में भेजा था। इनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पाकिस्तान की आतंकवाद में संलिप्तता के बारे में जागरूक करना और भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना था।
प्रतिनिधिमंडल तीन जून को वॉशिंगटन पहुंचा, जहां तीन दिनों तक व्यस्त कार्यक्रमों के दौरान उन्होंने अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) में अमेरिकी सांसदों, विदेश नीति विशेषज्ञों, थिंक टैंकों के प्रतिनिधियों, मीडिया और प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ संवाद किया।
थरूर ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस के साथ हुई लगभग 25 मिनट की बैठक को उत्कृष्ट बताया।
पीटीआई-भाषा से बातचीत में उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति वेंस ने पहलगाम हमले पर गहरी नाराजगी जताई और भारत की संयमित प्रतिक्रिया के लिए समर्थन व्यक्त किया। यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी गई।
इसके अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी सदन की विदेश मामलों की समिति, इंडिया कॉकस, सीनेट की विदेश मामलों की समिति के नेताओं और कई अन्य अमेरिकी सांसदों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में भारत ने अपनी आतंकवाद विरोधी नीति को मजबूती से प्रस्तुत किया और वैश्विक समुदाय से पाकिस्तान के आतंकवाद प्रायोजित एजेंडे पर सख्त कदम उठाने का आह्वान किया।
इस दौरे ने भारत की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर न केवल स्पष्ट रूप से पेश किया, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने में भी मदद की।





