पीएम मोदी ने आगे कहा कि इसमें भी डिस्ट्रिक्ट मॉनिटरिंग कमेटी की भूमिका अहम है, जिसमें डिस्ट्रिक्ट जज, डीएम और एसपी शामिल होते हैं। इन कमेटी को और सक्रिय करने की जरूरत है। महिला अत्याचारों से जुड़े मामलों में जितनी तेजी से फैसले आएंगे, लोगों को सुरक्षा का उतना ही अधिक आश्वासन मिलेगा। इसके अलावा कॉन्फ्रेंस में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल भी मौजूद रहे।
सुप्रीम कोर्ट की डायमंड जुबली
पीएम ने सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के 75 साल पूरे होने के मौके पर डाक टिकट और सिक्के का अनावरण भी किया। पीएम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 75 साल, केवल एक संस्था की यात्रा नहीं है। ये यात्रा है भारत के संविधान और संवैधानिक मूल्यों की। ये यात्रा है एक लोकतंत्र के रूप में भारत के और परिपक्व होने की। भारत के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट पर, हमारी न्यायपालिका पर कभी अविश्वास नहीं किया। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के ये 75 साल मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में भारत के गौरव को और बढ़ाते हैं।
सीजीआई की अध्यक्षता में दो दिनों तक चलेगी कॉन्फ्रेंस
शनिवार को शुरू हुई जिला अदालतों की नेशनल कॉन्फ्रेंस दो दिनों तक चलेगी। इसका आयोजन सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया जा रहा है। इस कॉन्फ्रेंस में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिला अदालतों से 800 से ज्यादा प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। कॉन्फ्रेंस में 5 सत्र आयोजित किए जाएंगे। सम्मेलन के पहले दिन अदालतों के इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन को बढ़ाने के तरीकों की खोज पर चर्चा होगी। साथ ही जजों की सुरक्षा और कल्याणकारी पहलुओं पर भी विचार-विमर्श होगा।
कार्यक्रम के दूसरे दिन केस हैंडलिंग और लंबित मामलों में कमी के लिए रणनीतियों पर चर्चा होगी। इसके लिए केस मैनेजमेंट पर एक सत्र आयोजित किया जाएगा। साथ ही जजों के लिए न्यायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। 1 अगस्त को कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भाषण होगा। राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के ध्वज और प्रतीक चिह्न का भी अनावरण करेंगी।





