अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार, ज्ञानी कुलदीप सिंह गारगज ने भी इस दावे को पूरी तरह से खारिज किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी वाकया नहीं हुआ जैसा सेना के अधिकारी ने कहा है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि स्वर्ण मंदिर के सुरक्षा मुद्दों पर किसी भी तरह की अनुमति का सवाल ही नहीं उठता। एसजीपीसी के प्रमुख ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि न तो पाकिस्तान और न ही भारत की सेना स्वर्ण मंदिर पर किसी भी प्रकार का हमला करने के बारे में सोच सकती है। उनका कहना था कि स्वर्ण मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह एक जीवनदायिनी स्थल है, जहां लाखों लोग शांति और भलाई के लिए आते हैं।
यह विवाद तब सामने आया जब सुमेर इवान डी कुन्हा, भारतीय सेना के वायुरक्षा महानिदेशक, ने एक इंटरव्यू में यह दावा किया कि पूरा पाकिस्तान भारत की रेंज में है और अगर भारत ने आक्रमण करने का मन बना लिया, तो पाकिस्तान की सेना कहीं भी छिपने के लिए जगह नहीं पा सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना को अपनी सुरक्षा के लिए “गहरा गड्ढा” ढूंढ़ना होगा, जहां वे छिप सकें। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच सुरक्षा मुद्दों पर फिर से चर्चा का दौर शुरू हो गया है।
इस विवाद के बाद, एसजीपीसी ने यह भी कहा था कि स्वर्ण मंदिर जैसे धार्मिक स्थल पर किसी भी प्रकार का हमला करना भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए असंभव है, और ऐसी कोई कार्रवाई करने की सोच भी नहीं सकता। इस मामले में एसजीपीसी ने स्पष्ट किया कि इस तरह के झूठे दावों से केवल दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ सकते हैं, और धार्मिक स्थलों की पवित्रता को बनाए रखना दोनों देशों की जिम्मेदारी है।





