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"औरंगजेब की कट्टर नीतियों से ढह गया मुगल साम्राज्य" – कांग्रेस नेता हरीश रावत

हरीश रावत ने कहा, "यह ऐतिहासिक तथ्य है कि औरंगजेब एक निरंकुश शासक था और कुछ हद तक धर्मांध भी था। यह भी सच है कि मुगल साम्राज्य का पतन उसकी धार्मिक कट्टरता के कारण ही शुरू हुआ।"

"औरंगजेब की कट्टर नीतियों से ढह गया मुगल साम्राज्य" – कांग्रेस नेता हरीश रावत
फोटो: Harish Rawa, Mughal Empire
छत्रपति संभाजी महाराज पर बनी फिल्म ‘छावा’ के बाद मुगल शासक औरंगजेब को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। खासतौर पर महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबु आजमी के बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है। अब इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी अपनी राय दी है। उन्होंने साफ कहा कि औरंगजेब एक निरंकुश और धार्मिक रूप से कट्टर शासक था, जिसकी वजह से ही मुगल साम्राज्य का पतन शुरू हुआ।
 

हरीश रावत का बयान: "औरंगजेब के कट्टर रवैये से ढह गया मुगल साम्राज्य"


न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में हरीश रावत ने कहा, "यह ऐतिहासिक तथ्य है कि औरंगजेब एक निरंकुश शासक था और कुछ हद तक धर्मांध भी था। यह भी सच है कि मुगल साम्राज्य का पतन उसकी धार्मिक कट्टरता के कारण ही शुरू हुआ।" औरंगजेब को लेकर चल रही बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने आगे कहा, "देश में कुछ नेता खुद को प्रमाण पत्र बांटने का अधिकारी समझने लगे हैं। कौन किसको प्रमाण पत्र दे रहा है, इस पर मैं टिप्पणी नहीं करना चाहता। हालांकि, आम धारणा यही है कि औरंगजेब के शासनकाल के बाद ही मुगल साम्राज्य का पतन हुआ। उससे पहले के मुगल शासकों ने सत्ता में सभी को शामिल करने की कोशिश की, लेकिन औरंगजेब की नीतियों ने समाज में विभाजन की नींव रख दी।"

बीजेपी ने कांग्रेस और सपा को लिया आड़े हाथ


अबु आजमी की टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को घेर लिया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सनातन धर्म को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने अबु आजमी के बयान को ‘संपूर्ण भारतीय समाज का अपमान’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन के दल अल्पसंख्यक वोट बैंक के लिए हिंदू-विरोधी बनने की होड़ में लगे हुए हैं।

अबु आजमी ने अपने बयान में कहा था कि औरंगजेब के शासनकाल में भारत की सीमाएं अफगानिस्तान और बर्मा तक फैली हुई थीं। उन्होंने दावा किया, "उस समय भारत की GDP 24% थी और देश को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था।" जब उनसे औरंगजेब और छत्रपति संभाजी महाराज के संघर्ष के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे केवल राजनीतिक लड़ाई बताया।

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