रिजिजू ने यह भी बताया कि संसद का यह सत्र 4 अप्रैल तक चलेगा, और लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी इस बिल को पारित कराने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। उन्होंने यह बात भी रखी कि राज्यसभा के लिए समय देना बहुत आवश्यक होगा क्योंकि वहां भी चर्चा का अधिकार सभी सदस्यों का है और यह लोकसभा जितना महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, रिजिजू ने विपक्ष को चेतावनी दी कि अगर विपक्ष के पास इस बिल पर चर्चा करने के लिए कोई ठोस तर्क नहीं हैं, तो वे बिना किसी बहाने के अपने विचार खुलकर सामने रखें। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी दल इस बिल पर चर्चा के दौरान घुमा-फिरा बयान देने के बजाय सीधे-सीधे अपनी बात रखें, तो इससे संसद की कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
वहीं, विपक्ष ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया था, क्योंकि सरकार ने पहले चार से छह घंटे चर्चा का प्रस्ताव रखा था, जबकि विपक्षी दलों ने इस पर कम से कम 12 घंटे चर्चा की मांग की थी।
हालांकि, बाद में सरकार ने आठ घंटे की चर्चा पर सहमति दी और यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो समय को और बढ़ाया जा सकता है।
वक्फ बिल को लेकर सरकार काफी सतर्कता से कदम उठा रही है और इस बार सरकार का उद्देश्य है कि चर्चा बिना किसी व्यवधान के हो और कोई भी सदस्य उत्तेजित होकर ऐसे बयान न दे जो विपक्ष को हंगामा करने का मौका दे। इसीलिए सरकार ने सभी सांसदों से यह अपील की है कि वे अपनी बात मर्यादित और शांति से रखें, ताकि चर्चा सुचारु रूप से पूरी हो सके। बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों से भी आग्रह किया है कि वे इस बिल पर चर्चा के दौरान अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करें ताकि सरकार के पक्ष में बहुमत बना रहे।
इस प्रकार, वक्फ संशोधन बिल को लेकर सरकार ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है और यह उम्मीद जताई जा रही है कि इस बिल पर संसद में व्यापक चर्चा होगी, जिसका परिणाम सकारात्मक रहेगा।
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