Molitics Logo
होम 2030 तक खारी भूमि का दायरा होगा दोगुना, सरकार ने संसद में बताया आंकड़ा

2030 तक खारी भूमि का दायरा होगा दोगुना, सरकार ने संसद में बताया आंकड़ा

लोकसभा में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ICAR के एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि जलवायु परिवर्तन भारतीय कृषि पर गंभीर |

2030 तक खारी भूमि का दायरा होगा दोगुना, सरकार ने संसद में बताया आंकड़ा
फोटो: 2030 तक खारी भूमि का दायरा होगा दोगुना, सरकार ने संसद में बताया आंकड़ा
लोकसभा और राज्यसभा में विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें जलवायु परिवर्तन से लेकर कैंसर, सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन जैसे विषयों पर सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। विभिन्न मंत्रालयों के मंत्रियों ने सांसदों के सवालों के जवाब में आंकड़े और नीतिगत कदमों की जानकारी दी। लोकसभा में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि जलवायु परिवर्तन भारतीय कृषि पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। सिमुलेशन मॉडलिंग के आधार पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि वर्षा पैटर्न में बदलाव के चलते 2050 तक प्रति हेक्टेयर 10 टन मिट्टी का नुकसान होगा। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण लवणता प्रभावित क्षेत्र 2030 तक 6.7 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 11 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंचने की आशंका है। यह बदलाव खेती की उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है, जिससे किसानों के लिए नई चुनौतियां उत्पन्न होंगी।

सौर ऊर्जा उत्पादन में बढ़त और लागत में गिरावट


राज्यसभा में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और बिजली राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा उत्पादन उपकरणों की लागत में उल्लेखनीय गिरावट आई है। वर्तमान में सौर पीवी मॉड्यूल की कीमत 15-25 रुपये प्रति वाट है, जिससे यह जीवाश्म ईंधनों की तुलना में किफायती ऊर्जा स्रोत बन गया है। भारत में सौर ऊर्जा क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है। वर्ष 2023-24 में 15 गीगावाट सौर ऊर्जा स्थापित की गई थी, जबकि 2024-25 में 31 जनवरी, 2025 तक 18.5 गीगावाट की क्षमता पहले ही जोड़ी जा चुकी है।   स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने संसद में बताया कि भारत में कालाजार प्रभावित चार राज्यों—बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में रोग की घटनाओं को 2023 तक प्रति 10,000 जनसंख्या पर एक से कम कर दिया गया है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे देश 2027 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमाणन के लिए पात्र बन सकता है।

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: ऊर्जा क्षेत्र में नई क्रांति


राज्यसभा में स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने स्विट्जरलैंड स्थित फूड पैकेजिंग फोरम फाउंडेशन के एक अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें पाया गया कि 909 संभावित स्तन कैंसरकारी तत्वों में से 189 खाद्य संपर्क सामग्री (FCM) में मौजूद थे। इनमें से 30 रसायनों को चूहों पर किए गए प्रयोगों में कैंसरकारी पाया गया, जबकि 67 रसायनों में जीनोटॉक्सिसिटी का संदेह जताया गया। हालांकि, मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ये निष्कर्ष केवल संभावित खतरों की ओर इशारा करते हैं और मानव स्वास्थ्य पर इनके प्रभाव को समझने के लिए अधिक शोध की आवश्यकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) इस दिशा में विज्ञान आधारित मानकों को लागू कर रहा है।

स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में बताया कि कर्नाटक में कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2023 के बीच राज्य में लगभग 87,000 नए कैंसर के मामले दर्ज किए गए हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR)- राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (NCRP) के आंकड़ों से भी यह संकेत मिलता है कि कर्नाटक में कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ रही है।

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: ऊर्जा क्षेत्र में नई क्रांति


नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने संसद में बताया कि भारत सरकार ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को क्रियान्वित कर रही है, जिसका उद्देश्य देश को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। फिलहाल, 4,12,000 टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता आवंटित की गई है, और इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण क्षमता 3,000 मेगावाट प्रति वर्ष निर्धारित की गई है। यह पहल भारत को स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में बताया कि राष्ट्रीय बांस मिशन (NBM) के तहत असम में 10 नई बांस नर्सरियों की स्थापना की गई है। इससे पौधों की वार्षिक उत्पादन क्षमता 2.5 लाख तक पहुंच गई है। 2018-19 से लेकर अब तक असम में 1,856 हेक्टेयर क्षेत्र को बांस की खेती के अंतर्गत लाया गया है। वहीं, वन क्षेत्रों में बांस से आच्छादित क्षेत्र 2021 में 10,659 वर्ग किमी से बढ़कर 2023 में 11,246 वर्ग किमी हो गया है।