रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि देशभर में वक्फ संपत्तियों पर लगभग 10 से 15 लाख किरायेदार रहते हैं, और अकेले दिल्ली में 2600 किरायेदार वक्फ संपत्तियों पर निवास कर रहे हैं। दिल्ली के किरायेदारों के हवाले से रिपोर्ट में यह कहा गया कि ये किरायेदार तीन पीढ़ियों से वक्फ संपत्तियों में रह रहे हैं और कई बार अपनी दुकानों की मरम्मत भी कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कभी भी कोई मुआवजा नहीं मिला। इसके अलावा, वक्फ बोर्ड ने समय-समय पर इनसे बड़ी राशियां दान के रूप में ली हैं और किराया भी बढ़ाया है, लेकिन अब उन्हीं किरायेदारों को संपत्तियों की नीलामी का सामना करना पड़ रहा है।
वक्फ किरायेदारों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब किसी किरायेदार का निधन हो जाता है, तो उनके उत्तराधिकारी को कोई अधिकार नहीं दिया जाता और वक्फ बोर्ड उनसे फीस वसूलने की कोशिश करता है, जो पूरी तरह अनुचित है। समिति ने इन चिंताओं को गंभीरता से लिया है और सरकार से सख्त कदम उठाने की अपील की है। समिति का कहना है कि वक्फ बोर्ड और किरायेदारों के बीच विश्वास और सहयोग का माहौल बनना चाहिए, ताकि दोनों पक्षों का भला हो सके। सरकार पर अब दबाव बढ़ गया है कि वह वक्फ किरायेदारों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए और उनका भविष्य सुरक्षित करे।
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि वक्फ किरायेदारों के बीच भय और असुरक्षा को समाप्त करने के लिए, वक्फ संपत्तियों का किराया बढ़ने और बेदखली से बचने के लिए लंबी अवधि के पट्टे दिए जाएं, ताकि किरायेदारों का भविष्य सुरक्षित रहे और वक्फ संपत्तियों की स्थिति भी बेहतर हो। समिति ने मंत्रालय से यह अपील की है कि वे पूरे देश में वक्फ किरायेदारों की समस्याओं पर विचार करें और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी कदम उठाए।
Read This Also:- क्या चीन युद्ध की तैयारी कर रहा? सैटेलाइट इमेजरी से नए कमांड कॉम्प्लेक्स का खुलासा, कई स्तर पर सैन्य तैयारियां
Read This Also:- क्या चीन युद्ध की तैयारी कर रहा? सैटेलाइट इमेजरी से नए कमांड कॉम्प्लेक्स का खुलासा, कई स्तर पर सैन्य तैयारियां





