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तमिलनाडु में TASMAC घोटाले पर घमासान, भाजपा नेता सुंदरराजन को पुलिस ने हिरासत में लिया

घोटाले को लेकर भाजपा सरकार पर हमलावर हो गई है और इसे तमिलनाडु के लोगों के साथ धोखा करार दिया है। इस बीच, भाजपा नेता और पुडुचेरी की उपराज्यपाल तमिलिसाई |

तमिलनाडु में TASMAC घोटाले पर घमासान, भाजपा नेता सुंदरराजन को पुलिस ने हिरासत में लिया
फोटो: तमिलनाडु में TASMAC घोटाले पर घमासान, भाजपा नेता सुंदरराजन को पुलिस ने हिरासत में लिया
तमिलनाडु में सरकारी शराब कंपनी तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) में कथित 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। घोटाले को लेकर भाजपा सरकार पर हमलावर हो गई है और इसे तमिलनाडु के लोगों के साथ धोखा करार दिया है।  इस बीच, भाजपा नेता और पुडुचेरी की उपराज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन को पुलिस ने चेन्नई में उनके घर से हिरासत में ले लिया। 

हिरासत में लिए जाने से पहले उन्होंने कहा, "वे मुझे मेरे घर से जबरन ले जा रहे हैं... मैं अकेले नहीं जाऊंगी। मैं चाहती हूं कि हर कोई मेरे साथ चले।" उनके इस बयान के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में और अधिक आक्रोश देखने को मिला। पार्टी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया और राज्य सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

सरकार की सफाई: 'आरोप निराधार'


हालांकि, इस मामले पर राज्य सरकार ने अपने बचाव में सफाई दी है। तमिलनाडु के आबकारी मंत्री वी सेंथिल बालाजी ने भाजपा और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा, "ED द्वारा TASMAC में 1,000 करोड़ रुपये के घोटाले का जो दावा किया जा रहा है, वह कोरी कल्पना मात्र है। यह एक सामान्य आरोप है और सरकार कानूनी रूप से इस मामले का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।" उन्होंने आगे कहा कि TASMAC पूरी पारदर्शिता के साथ काम करने वाली सरकारी एजेंसी है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप अस्वीकार्य हैं। आबकारी मंत्री ने दावा किया कि भाजपा जानबूझकर राज्य सरकार की छवि धूमिल करने के लिए इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रही है।

क्या है TASMAC घोटाला?


सरकारी स्वामित्व वाली तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) का राज्य में शराब के व्यापार पर पूर्ण एकाधिकार है। यह थोक विक्रेता के रूप में कार्य करता है और राज्यभर में शराब की दुकानें संचालित करता है। ईडी की जांच में यह सामने आया कि TASMAC के तहत शराब की अतिरिक्त आपूर्ति के लिए रिश्वत दी गई थी। यानी शराब विक्रेताओं को अतिरिक्त ऑर्डर हासिल करने के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ी। आरोप है कि इस भ्रष्टाचार के जरिए सरकार से जुड़े अधिकारियों और अन्य लोगों ने भारी मुनाफा कमाया। ईडी ने इस मामले में कई बड़े अधिकारियों और सरकार से जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि इस भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसमें सरकार के उच्च पदस्थ अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है।

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