मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा के भारत प्रत्यर्पण के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से मांग की कि राणा को बिना देरी के फांसी दी जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सरकार आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान इस फैसले को लागू करेगी, ताकि इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मुंबई हमले में शामिल एक गुनहगार तहव्वुर राणा को भारत लाना एक बड़ी कार्रवाई है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। उसे शीघ्र सज़ा मिलनी चाहिए। हमारी मांग है कि उसे जल्द से जल्द फांसी दी जाए।"
उन्होंने आगे कहा कि "सिर्फ राणा की बात नहीं है, हम कुलभूषण जाधव को भी भारत लाने की मांग करते हैं। एक भारतीय नागरिक, जिसे झूठे आरोपों में फंसाया गया और पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुना दी।"
कुलभूषण जाधव का मुद्दा फिर गरमाया
राउत ने पाकिस्तान द्वारा कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी और सुनवाई को ‘अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन’ बताते हुए कहा कि भारत सरकार को इस मामले को पुनः अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहिए और हरसंभव प्रयास कर जाधव की वतन वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए।
जाधव को 2016 में ईरान से अगवा कर पाकिस्तान ले जाया गया था, जहां उनके वैध व्यापारिक हित थे। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने 2019 में पाकिस्तान को जाधव की फांसी पर रोक लगाने का आदेश दिया था, लेकिन अभी तक उनकी रिहाई नहीं हो सकी है।
राउत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "राणा को प्रत्यर्पित करने की प्रक्रिया पिछले 16 वर्षों से चल रही थी, जिसकी शुरुआत कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इसलिए भाजपा को इसका श्रेय नहीं लेना चाहिए। यह सिर्फ एक सरकार की नहीं, बल्कि पूरे देश की लड़ाई थी।"
उन्होंने यह भी कहा कि तहव्वुर राणा भारत प्रत्यर्पित होने वाला पहला हाई-प्रोफाइल आतंकी नहीं है। उन्होंने जोड़ा, "1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले के आरोपी अबू सलेम को भी प्रत्यर्पित किया गया था। ऐसे ही अन्य आर्थिक अपराधियों जैसे नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को भी भारत लाया जाना चाहिए।





