मालीवाल ने इस मुद्दे को शून्यकाल के दौरान उठाया और कहा कि जबकि ऑटो रिक्शा, टैक्सी और कैब के लिए कड़े नियम हैं, ई-रिक्शा के लिए ऐसी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण यह अराजकता का कारण बन रहे हैं और सड़कों पर जाम लगाते हैं।
मालीवाल ने ई-रिक्शा को पहले किफायती और पर्यावरण के अनुकूल साधन के रूप में देखा गया था, लेकिन अब यह बिना किसी निगरानी और नियंत्रण के दिल्ली सहित अन्य शहरों में अव्यवस्था का कारण बन गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में अधिकांश मेट्रो स्टेशनों और बाजारों के बाहर सैकड़ों ई-रिक्शा सड़कों पर अवैध रूप से जाम लगा रहे हैं, जिससे यातायात की स्थिति बिगड़ रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि बहुत से ई-रिक्शा चालक बिना लाइसेंस के होते हैं, और उन्हें किसी भी प्रकार की ट्रेनिंग भी नहीं मिलती। इसके अलावा, वे अक्सर गलत दिशा में गाड़ी चलाते हैं, ओवरस्पीडिंग करते हैं और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हुए रेड लाइट भी जंप कर जाते हैं। मालीवाल ने बताया कि दिल्ली में करीब ढाई लाख से ज्यादा ई-रिक्शा चल रहे हैं, लेकिन इनमें से कितने रजिस्टर्ड हैं और कितने के पास लाइसेंस है, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
स्वाति मालीवाल ने राज्य सरकारों से अपील की कि वे सबसे पहले ई-रिक्शा की संख्या को नियंत्रित करें, साथ ही इन वाहनों और उनके चालकों का लाइसेंसिंग करें।
इसके अलावा, रूट और स्टैंड का निर्धारण किया जाए और अवैध चार्जिंग पॉइंट्स को बंद किया जाए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई ई-रिक्शा चालक यातायात नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। मालीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर राज्य सरकारों की जवाबदेही तय करनी चाहिए ताकि ई-रिक्शा के संचालन में कोई अव्यवस्था न हो और सड़कें सुरक्षित रहें।
अंत में, मालीवाल ने कहा, "हमें सुविधाएं चाहिए, लेकिन सिस्टम के तहत, हमें रफ्तार चाहिए, लेकिन जिम्मेदारी के साथ, और सबसे महत्वपूर्ण बात, हमें प्रगति चाहिए, लेकिन किसी की जिंदगी की कीमत पर नहीं।" उनके इस बयान में यह साफ संदेश था कि अगर हमें विकास की ओर बढ़ना है, तो हमें सुरक्षित और नियंत्रित परिवहन प्रणाली की आवश्यकता है।
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