आज कोर्ट में क्या हुआ
कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद से पूछा कि जिन दवाओं के लाइसेंस को सस्पेंड किया गया है उन दवाओं को वापस लेने के लिए क्या किया गया? पतंजलि की तरफ़ से पेश वक़ील बलबीर सिंह ने कहा कि हमने प्रोडक्ट्स की बिक्री को रोक दिया है। हम इसपर कोर्ट में एक हलफ़नामा भी दाखिल करेंगे।जिसके लिए कोर्ट ने तीन हफ़्तों का समय दिया है।
जस्टिस अमानुल्लाह ने रामदेव के वक़ील मुकुल रोहतगी से पूछा कि आपके क्लाइंट को कुछ साल पहले हार्ट अटैक के चलते AIIMS अस्पताल जाना पड़ा था। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव पर लोग भरोसा करते हैं उनकी बात सुनते हैं, उन्हें जनता को कम नहीं आँकना चाहिये।सॉलिसिटर जनरल एसजी मेहता टिप्पणी करते है कि बहुत सारे एलोपैथी डॉक्टर्स, आयुर्वेद पर भी भरोसा करते हैं।
आईएमए के अध्यक्ष को कोर्ट ने लगायी फटकार
कोर्ट ने आईएमए अध्यक्ष अशोकन को फटकार लगाते हुए पूछा कि आपने कोर्ट के ख़िलाफ़ इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल क्यों किया? आप में और दूसरे पक्ष(पतंजलि) में कोई फर्क़ नहीं रह गया है, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। दरअसल, कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान एलोपैथी के डॉक्टर्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये थे। जिसे आईएमए अध्यक्ष अशोकन ने एक तरह से गलत बताया था। कोर्ट ने कहा, “आप जानते हैं कि आप क्या कह रहे हैं, आप कोर्ट के बारें में ऐसे ही कुछ भी नहीं कह सकते हैं। आप आईएमए के अध्यक्ष है जिसके 3 लाख़ 50 हज़ार डॉक्टर सदस्य हैं। आप लोगों पर कैसी छाप छोड़ना चाहते हैं?”
कोर्ट ने कहा कि आपने जो माफ़ी का हलफ़नामा दाख़िल करवाया है, इसमें आपने पब्लिक में माफ़ी क्यों नहीं माँगी हैं। आपने पेपर में माफ़ीनामा क्यों नहीं छपवाया है? आप एक जिम्मेदार व्यक्ति है, आपको ज़वाब देना होगा। आपने 2 हफ़्तों तक कुछ नहीं किया है। कोर्ट ने कहा, “आप लंबित मामले में एक पक्षकार है, फिर भी आपके बयान काफ़ी चौकाने वाले हैं। कोर्ट के जज भी अपने फैसलों को लेकर आलोचनाओं का शिकार होते हैं, लेकिन हम कुछ बोलते नहीं हैं क्योंकि हम में अहंकार नहीं है। हम आपके हलफनामें में दर्ज़ माफ़ीनामे को ठुकरा रहे हैं, क्योंकि हमें आपकी माफ़ी संतोषजनक नहीं लगी है।”
कोर्ट ने 7 मई की सुनवाई में कहा कि यदि कोई भी एक्टर या इन्फ्लुएंसर भ्रामक विज्ञापन में शामिल पाया गया, तो उसके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जायेगी। इसमें कोई भी लापरवाही नहीं बरती जायेगी।





