इसके अलावा, यह भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि जिन 25 मृतकों की पहचान की गई थी, उनमें से 19 की पहचान गलत निकली थी या नहीं। इसके अलावा, पहले जिन 5 अज्ञात मृतकों का जिक्र किया गया था, उनकी पहचान हो पाई है या नहीं, यह भी अब तक साफ नहीं है।
डीआईजी वैभव कृष्ण ने पहले 30 मृतकों के बारे में जानकारी दी थी, जिसमें प्रदेश से बाहर के 6 लोग शामिल थे। लेकिन अब बिहार से 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिसे वहां के प्रशासनिक अधिकारियों ने भी सत्यापित किया है। इसके अलावा, बंगाल के दो लोगों की मौत की भी खबरें आई हैं, और उनके परिवार का दावा है कि उन्हें बिना मृत्यु प्रमाणपत्र दिए शव सौंपे गए हैं। इस तरह से मृतकों की संख्या और पहचान को लेकर लगातार भ्रम बना हुआ है।
इसके अलावा, एक और महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या मौनी अमावस्या के दौरान सिर्फ एक भगदड़ हुई थी या फिर इसके अलावा और भी भगदड़ें मची थीं? कुछ समाचार पत्रों में दावा किया जा रहा है कि झूंसी इलाके में भी एक भगदड़ हुई थी, जिसमें लगभग दो दर्जन लोग हताहत हुए थे। इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मीडिया में इसे लेकर कई तरह की रिपोर्ट्स आ रही हैं।
हादसे के बाद, कई परिवारों के लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं। मोबाइल फोन बंद होने के कारण परिजनों को और भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वे लगातार परेड ग्राउंड स्थित केंद्रीय अस्पताल, एसआरएन अस्पताल और मेडिकल कॉलेज का चक्कर लगा रहे हैं। झांसी के सरमऊ निवासी शिशुपाल ने बताया कि उनके पिता महेश यादव का मंगलवार से कोई पता नहीं चल रहा है। उन्होंने कहा कि उनके पिता 27 जनवरी को संगम आए थे, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इसी तरह, महाराष्ट्र के भंडारा जिले की शीला मंडल ने बताया कि उनके पिता विष्णुपदा से भी मंगलवार रात से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वे लगातार अस्पतालों और खोया-पाया केंद्र से मदद की कोशिश कर रही हैं।
घायलों के बारे में भी कई अपडेट सामने आए हैं। हादसे के बाद 41 घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए केंद्रीय अस्पताल लाया गया, और बाद में उन्हें स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इनमें से 4 घायलों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि बाकी का इलाज अभी भी जारी है। अस्पताल में घायलों के इलाज और अन्य व्यवस्थाओं से परिजन संतुष्ट दिखे। ट्रामा सेंटर और नए भवन के वार्ड चार में घायलों को भर्ती किया गया है, और अस्पताल में हर बेड पर नई चादरें और सेंट्रलाइज्ड ऑक्सीजन पाइप की व्यवस्था की गई है। मरीजों की निगरानी के लिए युवा पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है, और घायलों ने इलाज की तारीफ की है।
अस्पताल में सभी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि घायलों को बेहतर उपचार मिल सके और वे जल्द ठीक हो सकें।
हालांकि, अभी भी कई परिवारों के लिए यह स्थिति असहनीय है क्योंकि वे अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पतालों का चक्कर लगा रहे हैं और उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पा रही है।





