उन्होंने दावा किया कि उस दौर में भारत की जीडीपी 24% थी और देश को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को सही इतिहास नहीं पढ़ाया जा रहा है।
सपा नेता ने यह भी कहा कि औरंगजेब ने सिर्फ मंदिर ही नहीं, बल्कि मस्जिदें भी नष्ट करवाई थीं। उन्होंने यह तर्क दिया कि अगर औरंगजेब वास्तव में हिंदू विरोधी होते, तो उनके प्रशासन में 34% हिंदू सलाहकार कैसे होते?
महाराष्ट्र में क्यों बढ़ा विवाद?
महाराष्ट्र में मराठा समुदाय की राजनीति में अहम भूमिका होती है, और इसी वजह से यह मुद्दा और भी ज्यादा संवेदनशील हो गया है। औरंगजेब को मराठा इतिहास के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक माना जाता है, क्योंकि उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ युद्ध लड़ा था। ऐसे में अबू आजमी के बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया।
जब विवाद ने तूल पकड़ा, तो अबू आजमी ने अपील की कि इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम का रंग न दिया जाए। उन्होंने कहा कि इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और लोगों को इसे निष्पक्ष रूप से देखना चाहिए। हालांकि, उनकी सफाई के बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी हैं और महाराष्ट्र में कई संगठनों ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की है।
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