हालांकि, स्वतंत्र रहने का विकल्प हमेशा खुला है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में राजनीति के संदर्भ में एक पार्टी का होना और उसकी विचारधारा को समर्थन देना जरूरी है, ताकि पार्टी अपने सिद्धांतों और घोषणापत्र को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके। थरूर ने यह भी कहा कि किसी पार्टी का संगठनात्मक आधार मजबूत होना चाहिए, ताकि विचारों को ताकत मिले और पार्टी उन सिद्धांतों पर चलकर सही दिशा में आगे बढ़े।
इसके साथ ही उन्होंने भाजपा की राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा, "भा.ज.पा. ने जिस तरह से अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाया है, वह कई राज्यों में सफलता हासिल करने में सक्षम रही है। जबकि कांग्रेस में हमें यह संगठनात्मक ताकत महसूस नहीं होती, जो भाजपा के पास है। हम (कांग्रेस) में कार्यकर्ताओं की कमी है, जबकि भाजपा में यह स्थिति अलग है।"
थरूर ने माना कि कांग्रेस में पार्टी के कैडर और कार्यकर्ताओं का अभाव है, जबकि इसके मुकाबले भाजपा ने कई राज्यों में अपनी शक्ति और विचारधारा को साबित किया है।
शादी के विषय पर पूछे जाने पर थरूर ने स्पष्ट रूप से कहा, "बिल्कुल नहीं। मैंने जीवन में बहुत कुछ अनुभव किया है। पिछले 10 वर्षों से मैं सिंगल हूं।" उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मां उन्हें शादी के लिए प्रेरित करती रहती हैं, लेकिन वह अपनी वर्तमान स्थिति से पूरी तरह संतुष्ट हैं। आपको बता दें कि शशि थरूर की पत्नी, सुनंदा पुष्कर का निधन जनवरी 2014 में हो गया था, जिसके बाद से वह सिंगल हैं।
थरूर का यह बयान न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में बल्कि भारतीय राजनीति और पार्टी के अंदर उनकी विचारधारा के बारे में भी महत्वपूर्ण संकेत देता है। उनके इस बयान से यह साफ हो गया कि वह किसी भी पार्टी के साथ जुड़ने से पहले उसकी विचारधारा और सिद्धांतों का गहराई से विश्लेषण करते हैं, और केवल उसी स्थिति में किसी पार्टी का हिस्सा बनना उचित मानते हैं, जब उसकी विचारधारा उनके अपने विचारों से मेल खाती हो।
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