थरूर ने स्पष्ट किया कि जब पाकिस्तान के साथ टकराव की स्थिति होती है, तो उस दौरान चीन को नजरअंदाज करना लगभग असंभव है।
### भारत और चीन के रिश्तों पर चर्चा
थरूर ने भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि जून 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बावजूद, पिछले साल सितंबर में भारत और चीन ने अपने संबंधों को सुधारने की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, पाकिस्तान को समर्थन देने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसका पक्ष लेने के मामले में चीन का रवैया बिल्कुल अलग नजर आया। उन्होंने कहा, "हम अपने पड़ोस में मौजूद चुनौतियों के प्रति किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं रखते हैं। फिर भी, भारत ने हमेशा अपने विरोधियों के साथ संवाद का मार्ग खुला रखा है।"
थरूर ने आगे कहा कि भारत ने अपने विकास, आर्थिक वृद्धि और व्यापार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत और चीन के बीच व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर है, जो यह दर्शाता है कि भारत कोई शत्रुतापूर्ण रवैया नहीं अपना रहा। उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिकता बातचीत और विकास है। लेकिन यदि हम अपने आस-पास होने वाली गतिविधियों से अनजान रहते हैं, तो यह हमारी बड़ी नासमझी होगी।"





