न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में संजय निरुपम ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा, "कांग्रेस के लोगों को यह बात समझनी होगी कि जब राष्ट्र का मुद्दा हो तो दलगत राजनीति से ऊपर उठना चाहिए। शशि थरूर कांग्रेस के कई नेताओं से कहीं अधिक परिपक्व नेता के तौर पर उभर कर सामने आ रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के तहत हमने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और एयरबेस को तबाह कर दिया। हमने पहलगाम हमले का कड़ा बदला लिया है। अब हमारे सांसद दुनिया के विभिन्न मंचों पर जाकर पूरी सच्चाई सामने रख रहे हैं और भारत के पक्ष में वैश्विक समर्थन जुटा रहे हैं।"
संजय निरुपम ने कांग्रेस के अंदर के मतभेदों की भी ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, "यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक पवित्र और महत्वपूर्ण काम हो रहा है। अगर विपक्षी होने के बावजूद शशि थरूर को यह जिम्मेदारी दी गई है तो कांग्रेस को इसे सकारात्मक रूप में लेना चाहिए। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के लोग शशि थरूर को बदनाम करने में लगे हैं, उससे साफ हो जाता है कि पार्टी के अंदर पनपी कुंठाएं अब बाहर आ रही हैं।"
जब भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था, तब शशि थरूर ने सरकार की सराहना करते हुए कहा था कि भारत अब बदला हुआ है। उन्होंने यह भी बताया था कि आतंकवादी अब समझ चुके हैं कि उनके किए की कीमत चुकानी पड़ेगी। थरूर ने यह भी कहा कि सितंबर 2016 में पहली बार भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान एलओसी का उल्लंघन किया था और बाद में बालाकोट एयरस्ट्राइक में अंतरराष्ट्रीय सीमा भी पार की गई। यह भारतीय सैन्य इतिहास में एक नया कदम था।
उनके इस बयान पर कांग्रेस के कई नेताओं ने आपत्ति जताई। दिल्ली कांग्रेस नेता उदित राज ने यहां तक कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी को चाहिए कि वे शशि थरूर को अपनी पार्टी का प्रवक्ता या विदेश मंत्री बना लें। उदित राज ने आरोप लगाया कि शशि थरूर ने अपने बयान से पार्टी के स्वर्णिम इतिहास को धूमिल किया है।
इसी तरह, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी शशि थरूर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि थरूर ने अपनी किताब 'द पैराडॉक्सिकल प्राइम मिनिस्टर' में सर्जिकल स्ट्राइक की आलोचना भी की है, और अब उसी की तारीफ कर रहे हैं, जो विरोधाभास है। 17 मई को सरकार ने सांसदों के सात प्रतिनिधिमंडलों की घोषणा की थी, जिसमें शशि थरूर एकमात्र कांग्रेस सांसद थे। हालांकि, कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि उन्होंने थरूर का नाम केंद्र सरकार को नहीं दिया था।





