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राज्यसभा सांसद की बेटी ने फुटपाथ पर सो रहे व्यक्ति को कुचला, थाने से तुरंत मिली ज़मानत

राज्यसभा सांसद की बेटी ने फुटपाथ पर सो रहे व्यक्ति को कुचला, थाने से तुरंत मिली ज़मानत
फोटो: राज्यसभा सांसद की बेटी ने फुटपाथ पर सो रहे व्यक्ति को कुचला, थाने से तुरंत मिली ज़मानत
चेन्नई से एक हाई प्रोफाइल से जुड़ा मामला सामने आया है। वाईएसआर कांग्रेस से राज्यसभा सांसद बीड़ा मस्तान राव की बेटी माधुरी ने कथित तौर पर फुटपाथ पर सो रहे व्यक्ति पर अपनी बीएमडब्लू कार चढ़ा दी, जिससे मौके पर ही व्यक्ति की मौत हो गयी। मंगलवार को पुलिस ने माधुरी को गिरफ़्तार किया, लेकिन जल्द ही उन्हें ज़मानत भी मिल गयी। मामले में अड्यार ट्रैफिक इन्वेस्टिगेशन विंग पुलिस ने आईपीसी की धारा 304 (ए) (लापरवाही से मौत की वजह बनना) के तहत मामला दर्ज़ किया था, जोकि एक जमानती धारा है।

मामला क्या है
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, मृतक की पहचान सूर्या के रूप में की गयी है, जोकि पेशे से एक पेंटर है। पुलिस के मुताबिक़ सूर्या बेसेंट नगर में फुटपाथ पर सो रहा था, तभी तेज़ रफ़्तार से आ रही बीएमडब्लू ने सूर्या को कुचल दिया। घटना के तुरंत बाद आरोपी महिला माधुरी और उनके साथ मौजूद एक अन्य महिला मौके से फ़रार हो गयी। घटना से जुड़ा एक और वीडियो सामने आया है जिसमें माधुरी की दोस्त स्थानीय लोगों के साथ बहस करती हुई दिख रही है। वीडियो में महिला को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उन्होंने पीड़ित के लिए एम्बुलेंस बुलायी है। वीडियो में माधुरी और साथी महिला को घटनास्थल से जाते हुए भी देखा जा सकता है।

 पीड़ित के करीबियों का प्रदर्शन

पीड़ित के रिश्तेदार और पड़ोसियों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और न्याय की माँग करते हुए शास्त्री नगर के स्थानीय पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। सीसीटीवी फुटेज तलाशने पर पुलिस ने पाया कि कार बीड़ा मस्तान राव ग्रुप की है और पुडुचेरी में रजिस्टर्ड है। बीड़ा राव 2022 में राज्यसभा के सांसद बने थे, उससे पहले राव वाईएसआर कांग्रेस से विधायक भी रह चुके हैं। राव बीएमआर ग्रुप के मुख्य संस्थापक है, जो सी-फूड उद्योग में माना-जाना नाम है।

थाने से ज़मानत
ख़बरों के अनुसार आरोपी माधुरी को गिरफ्तारी के कुछ ही समाय बाद ही थाने से ज़मानत मिल गयी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुलिस ने हाई प्रोफाइल केस होने के नाते मामले में ढील बरती है। ऐसी ही घटना पुणे पोर्श एक्सीडेंट के मामले में देखने को मिली थी, जहाँ आरोपी नाबालिग को पुलिस ने घटना के कुछ ही देर बाद छोड़ दिया था। मामला बढ़ता देख पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी और मामला किशोर न्याय बोर्ड पहुंचा, जहाँ बोर्ड ने 300 शब्दों के निबंध लिखने के आधार पर ज़मानत दी। फैसले की आलोचना होते देख आरोपी की जमानत को रद्द कर दिया गया और उसे सुधार गृह भेजा गया।