राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, रघुवर दास को झारखंड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। वहीं, कुछ नेताओं का मानना है कि दास को राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर पदोन्नति दी जा सकती है। उनका यह प्रमोशन आगामी दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां ओबीसी मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।
बुधवार को पुरी के जगन्नाथ मंदिर में दर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत में दास ने कहा:
"मैं एक आम मजदूर परिवार से हूं। बूथ स्तर के कार्यकर्ता से लेकर विभिन्न पदों पर काम किया है। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व मेरे भविष्य का फैसला करेगा, और मैं जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा।"
परिवार से भी मिल रहा समर्थन
रघुवर दास की बहू पूर्णिमा साहू, जो वर्तमान में जमशेदपुर पूर्व सीट से विधायक हैं, ने कहा है कि वह अपने ससुर के लिए सीट खाली करने को तैयार हैं। उनका कहना है कि पार्टी जो भी निर्णय लेगी, वह उसका पालन करेंगी। रघुवर दास अपने कार्यकाल के दौरान कुछ विवादों का सामना भी कर चुके हैं। जुलाई में उनके बेटे ललित कुमार दास पर आरोप लगे थे कि उन्होंने ओडिशा राजभवन में तैनात सरकारी कर्मचारी बैकुंठ प्रधान के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी। प्रधान ने दावा किया कि पुरी में वाहन नहीं भेजने पर दास के बेटे और पांच अन्य लोगों ने उन पर हमला किया।
रघुवर दास अपने कार्यकाल के दौरान कुछ विवादों का सामना भी कर चुके हैं। जुलाई में उनके बेटे ललित कुमार दास पर आरोप लगे थे कि उन्होंने ओडिशा राजभवन में तैनात सरकारी कर्मचारी बैकुंठ प्रधान के साथ कथित तौर पर मारपीट की थी। प्रधान ने दावा किया कि पुरी में वाहन नहीं भेजने पर दास के बेटे और पांच अन्य लोगों ने उन पर हमला किया।
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