विपक्ष ने अमेरिकी डिपोर्टेशन मामले पर संसद में जोरदार हंगामा किया। 5 फरवरी को संसद की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा की मांग की और 'सरकार शर्म करो' के नारे लगाए। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने इस पर कहा कि यह एक विदेश नीति से जुड़ा हुआ मुद्दा है, और सरकार को इस पर पूरी जानकारी है। इसके बाद कार्यवाही 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस मामले पर चर्चा के लिए स्थगन नोटिस दिया। टैगोर ने कहा, "अमेरिका से 100 से ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट किए जाने की खबर ने पूरे देश को चौंका दिया है। यह न केवल एक मानवाधिकार का उल्लंघन है, बल्कि यह सरकार की पूरी नीति और सुरक्षा के खिलाफ भी है।" उन्होंने यह सवाल उठाया कि सरकार अब तक इस अमानवीय व्यवहार पर चुप क्यों है और इस पर सरकार को तत्काल प्रतिक्रिया देनी चाहिए।
सदन के बाहर भी विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। विपक्ष का कहना था कि भारतीय नागरिकों का डिपोर्टेशन न केवल मानवाधिकार का उल्लंघन है, बल्कि यह हमारे देश की प्रतिष्ठा और नागरिकों के अधिकारों के खिलाफ भी है। उनका यह भी मानना है कि इस मामले में सरकार को कठोर कदम उठाने चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
विपक्षी नेताओं ने सरकार से यह भी मांग की कि इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाया जाए और अमेरिका से यह सुनिश्चित किया जाए कि भारतीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाए। विपक्ष ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सरकार का रुख बहुत ही शांत और अपर्याप्त है, जबकि इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
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