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संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी, प्रशासन ने जारी किया अंतिम नोटिस

संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क की परेशानियाँ दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं, और अब उनके खिलाफ प्रशासन द्वारा बुलडोजर कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है।

संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी, प्रशासन ने जारी किया अंतिम नोटिस
फोटो: MP Ziaur Rahman Burke, Sambhal,
संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क की परेशानियाँ दिनों-दिन बढ़ती जा रही हैं, और अब उनके खिलाफ प्रशासन द्वारा बुलडोजर कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है। संभल प्रशासन ने सांसद के घर के खिलाफ तीसरा और अंतिम नोटिस जारी किया है। इस नोटिस का जवाब न मिलने पर 4 जनवरी के बाद सीधे सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अब और कोई नोटिस जारी नहीं किया जाएगा, बल्कि अब सीधे कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम वंदना मिश्रा ने बताया कि सांसद को 28 दिसंबर को तीसरा और अंतिम नोटिस भेजा गया था, जिसमें एक सप्ताह का समय दिया गया था, जो 4 जनवरी को समाप्त हो जाएगा। 

अगर इस समय सीमा के भीतर नोटिस का जवाब नहीं मिलता है, तो प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाए जाएंगे। सांसद जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हो चुके हैं। सबसे पहले, उन पर हिंसा भड़काने का आरोप था, जिसके बाद गाड़ी से संबंधित आदेशों की जांच शुरू की गई थी। इसके बाद, बिजली चोरी के मामले में सांसद पर 1.91 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था, और उनकी संपत्ति का बिजली कनेक्शन काट दिया गया था। साथ ही, उनके पिता पर भी जूनियर इंजीनियर को धमकाने का मामला दर्ज किया गया था। इन सभी घटनाओं के बीच अब प्रशासन ने उनके घर पर बुलडोजर चलाने का निर्णय लिया है, जिससे यह विवाद और भी गंभीर हो सकता है। 

यह कार्रवाई उनके घर के निर्माण से जुड़ी अवैधता के कारण हो रही है। प्रशासन का कहना है कि सांसद ने बिना नक्शा पास कराए अपना घर बनाया है, जिसके चलते पहले भी उन्हें दो नोटिस भेजे गए थे। पहले ही, सांसद के घर के बाहर नाली की सीढ़ियों पर बुलडोजर चल चुका है। इसके अलावा, इलाके में नगर पालिका द्वारा अवैध अतिक्रमण के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। अब प्रशासन ने इसे अंतिम चेतावनी के रूप में देखा है और कहा है कि 4 जनवरी के बाद कोई और नोटिस नहीं भेजा जाएगा, बल्कि सीधे कार्रवाई की जाएगी। यह स्थिति सांसद के लिए बहुत गंभीर हो सकती है, और इससे उनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी प्रभावित हो सकता है।