ईडी की कार्रवाई
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में साउथ मुंबई के वर्ली में स्थित सीजे हाउस की 12वीं और 15वीं मंजिल को ज़ब्त कर लिया था। ख़बरों के मुताबिक़ ज़ब्त किये गये अपार्टमेंट प्रफुल्ल की पत्नी और उनकी कंपनी मिलेनियम डेवलपर के नाम दर्ज़ हैं, जिसकी बाज़ार क़ीमत 180 करोड़ है। कार्रवाई के दौरान ईडी ने आरोप लगाया था कि जिस मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच एजेंसी कर रही है, उस संपत्ति को दाऊद इब्राहिम के सबसे नज़दीकी गैंगस्टर इक़बाल मिर्ची की पहली पत्नी हाजरा मेनन से अवैध तरीके से ख़रीदा गया था। इक़बाल मिर्ची 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले का मुख्य आरोपी है, जिसकी मौत 2013 में हो चुकी है।
विपक्ष ने क्या कहा
प्रफुल्ल पटेल पर फैसला आने के बाद विपक्ष ने अजीत पवार और प्रफुल्ल पटेल पर जबरदस्त हमला बोला है। महाराष्ट्र के विपक्षी दलों ने प्रफुल्ल को मिली राहत का श्रेय ‘भाजपा की वाशिंग-मशीन’ को दिया है। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद और नेता संजय राउत ने कहा कि ईडी ने जिस तरह से काम किया है, उससे उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह साफ़ हो गया है कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो(सीबीआई) और ईडी दोनों ही भाजपा का एक्सटेंशन (शामिल) हैं। जो भाजपा का विरोध करते है, उनकी सम्पत्तियों को एजेंसियां ज़ब्त कर देती हैं, और जो भाजपा के साथ है उनकी संपत्ति को छोड़ दिया जाता है। राउत ने कहा कि वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे, अगर उनसे उनके कपड़े भी छीन लिये जायें तब भी वह नहीं झुकेंगे।
विपक्ष को तोड़ने वाले भाजपा का हिस्सा
महाराष्ट्र में विपक्ष को तोड़ेने वाले कई नेता भाजपा में शामिल होकर राहत पा चुके हैं। इन नेताओं में अजीत पवार की एनसीपी, एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना शामिल है। भाजपा में शामिल होने से पहले अधिकतर नेताओं के ऊपर बीजेपी के आरोपों के बाद केंद्रीय एजेंसियों की जाँच चल रही थी। भाजपा में शामिल होने के बाद सभी को धीरे-धीरे कोर्ट से राहत मिल रही है, क्योंकि ईडी पर्याप्त सबूतों को कोर्ट में पेश नहीं कर पा रही है। लेकिन जो नेता अभी भी विपक्ष में हैं और उनपर कोई आरोप हैं तो जाँच एजेंसियों की दलीलों के कारण उन्हें कोर्ट से राहत नहीं मिल रही है।





