विक्ट्री डे परेड रूस के लिए एक अत्यंत गौरवशाली परंपरा है, जो हर साल द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की स्मृति में आयोजित होती है। यह परेड रूस की सैन्य ताकत का प्रतीक मानी जाती है और इसे भारत की गणतंत्र दिवस परेड की तरह भव्य रूप से आयोजित किया जाता है।
इस वर्ष का आयोजन विशेष रूप से ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि यह युद्ध विजय की 80वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। ऐसे में रूस ने दुनियाभर से कई प्रभावशाली नेताओं को आमंत्रित किया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले जुलाई 2024 में रूस का दौरा किया था, जो उनके तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय दौरा था। उस यात्रा में मोदी और पुतिन के बीच गहरी केमिस्ट्री और रणनीतिक साझेदारी की झलक देखने को मिली थी। उस मुलाकात में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और वैश्विक कूटनीति से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी।
हालांकि भारत सरकार की ओर से अब तक दौरे के स्थगन पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन कूटनीतिक हलकों में यह साफ माना जा रहा है कि मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य, विशेषकर पाकिस्तान से जुड़े घटनाक्रम, इस निर्णय के पीछे प्रमुख कारण हैं।
इस दौरे का स्थगन भारत-रूस संबंधों पर कोई स्थायी असर डालेगा या नहीं, यह समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट है कि सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दे सरकार की प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं।
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