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ओडिशा गँवाने के बाद नवीन पटनायक को आयी जनता की याद, नवंबर में शुरू करेंगे सूबे का दौरा

पीटीआई के अनुसार पार्टी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि यह निर्णय गुरुवार को वरिष्ठ नेता देबी प्रसाद मिश्रा की अध्यक्षता में बीजद की पहली राज्य समन्वय समिति की बैठक में लिया गया।

ओडिशा गँवाने के बाद नवीन पटनायक को आयी जनता की याद, नवंबर में शुरू करेंगे सूबे का दौरा
फोटो: ओडिशा गँवाने के बाद नवीन पटनायक को आयी जनता की याद, नवंबर में शुरू करेंगे सूबे का दौरा
अपने राजनीतिक जीवन में पहली हार के बाद बीजू जनता दल प्रमुख और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोगों और कार्यकर्ताओं से मिलने का फैसला लिया है। इसके लिए वह नवंबर में पुरे ओडिशा के दौरे पर निकलेंगे। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पार्टी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि यह निर्णय गुरुवार को वरिष्ठ नेता देबी प्रसाद मिश्रा की अध्यक्षता में बीजद की पहली राज्य समन्वय समिति की बैठक में लिया गया।

इससे पहले, नवीन पटनायक ने जिलों के साथ समन्वय स्थापित करने और राज्य पदाधिकारियों की उपस्थिति में पार्टी की सभी गतिविधियों की देखरेख के लिए 15 सदस्यीय समिति का गठन किया था। समन्वय समिति की बैठक में नवीन पटनायक ने यह महसूस किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से पुरे राज्य का दौरा करना चाहिए और विधानसभा चुनाव में भाजपा से मिली हार के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना चाहिए। पटनायक ने बैठक में पार्टी नेताओं को सलाह दी कि वह सार्वजनिक सेवा में सक्रिय रहे और पार्टी की योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में लोगों को सूचित करने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करें।

पटनायक ने कहा, “ओडिशा की जनता ने बीजद को 24 साल तक लगातार आशीर्वाद दिया, इसलिए हम सभी उनके ऋणी हैं।” पटनायक ने पार्टी नेताओं को कड़ी मेहनत करने और लोगों की सेवा जारी करने की सलाह भी दी। पटनायक ने कहा कि इसके लिए वह खुद नवंबर में पार्टी कार्यकर्ताओं और लोगों से मिलने के लिए राज्यव्यापी दौरा करेंगे। इसके अलावा समन्वय समिति की बैठक में पार्टी के युवा, छात्र और महिला विंग को पुनर्गठित करने पर भी विचार हुआ।


बीजेपी ने किया था नवीन के 24 साल के युग का अंत

इस साल मई में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने नवीन पटनायक की पार्टी बीजद को हराया था। ओडिशा में बीजेपी ने पहली बार सरकार बनाई और नवीन पटनायक के 24 साल के युग का अंत किया था। 147 विधानसभा सीटों वाले ओडिशा में 78 सीटें बीजेपी को, 51 सीटें बीजद को और कांग्रेस को 14 सीटें मिली थी। जबकि चार सीटें अन्य ने हासिल की थी। बीजेपी ने मोहन चरण माझी को मुख्यमंत्री बनाया था। विधानसभा चुनाव में ही बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया बल्कि ओडिशा में लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर हुआ था। चुनाव से पहले बीजेपी और बीजद के गठबंधन की कोशिश भी हुई थी और लगभग यह फाइनल स्टेज तक पहुंच गया था। लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर फिर बात नहीं बन पाई और बीजेपी-बीजद ने एक दूसरे के खिलाफ ही चुनाव लड़ा था।