महाकुंभ में दिखी भारत की सांस्कृतिक विराटता
पीएम मोदी ने कहा कि महाकुंभ के रूप में पूरे विश्व ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विराटता के दर्शन किए। उन्होंने इसे राष्ट्रीय चेतना का उत्सव बताते हुए कहा कि इस आयोजन से देशभर में आध्यात्मिक जागरूकता और एकता की भावना को बल मिला। महाकुंभ ने उत्साह, उमंग और सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया, जिससे युवा पीढ़ी भी इससे गहरे भाव से जुड़ी। पीएम मोदी ने कहा कि महाकुंभ के आयोजन पर सवाल उठाने वालों को इसका भव्य स्वरूप और सफलता करारा जवाब है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से देश के हर कोने में आध्यात्मिक चेतना जागृत हुई है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने हाल ही में मॉरिशस यात्रा के दौरान वहां के 'गंगा तालाब' में त्रिवेणी संगम का पवित्र जल अर्पित करने का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "महाकुंभ केवल आस्था का पर्व नहीं है, यह भारत की एकता और विविधता का जीवंत उदाहरण भी है। इस महोत्सव से देश की सामूहिक चेतना का जागरण हुआ है, जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक समृद्ध बनाएगा। महाकुंभ से एकता का अमृत निकला है, जिसे हमें संजोकर रखना होगा।"
पीएम के संबोधन के बाद विपक्ष का हंगामा
प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य के तुरंत बाद विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। विरोध के स्वर उठते ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने हस्तक्षेप किया और कहा कि सदन नियमों से चलता है। उन्होंने नियम 377 के तहत कार्यवाही को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया, जिससे हंगामे के बावजूद लोकसभा की कार्यवाही जारी रही। विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा जारी रखा और नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से शांति बनाए रखने और अपनी-अपनी सीटों पर लौटने की अपील की। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा, "अगर आप अपनी सीट पर बैठेंगे, तो एक बजे तक बोलने का अवसर दूंगा। इसके बाद एक बजे मंत्री अश्विनी वैष्णव जवाब देंगे।"
हालांकि, विपक्षी सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे और हंगामा जारी रखा। स्थिति को देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही एक बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।





