चौधरी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान भारत की वर्चस्ववादी नीति के खिलाफ अपने संघर्ष को जारी रखेगा, और यह स्थिति तब तक नहीं बदलेगी जब तक भारत को यह समझ में नहीं आता कि एकतरफा ताकत के बल पर शांति नहीं लाई जा सकती। पाकिस्तान की सेना का यह आक्रामक रुख यह स्पष्ट करता है कि वह 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारत की ओर से मिली कड़ी प्रतिक्रिया से घबराया हुआ है। पाकिस्तान अपनी जनता को यह संदेश देना चाहता है कि वह भारत के खिलाफ संघर्ष से पीछे नहीं हटेगा, खासकर तब जब ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने मुरीदके और बहावलपुर जैसे महत्वपूर्ण आतंकी ठिकानों पर हमला किया था और करीब 100 आतंकवादियों को मार गिराया था।
हालांकि, पाकिस्तान के इस आक्रामक रुख के पीछे एक रणनीति भी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी जनता को यह दिखाना चाहता है कि वह भारत के सामने कमजोर नहीं पड़ा है, और ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह उसके लिए एक बड़ा चुनौती बन गया है।
पाकिस्तान ने भारत पर कई हमलों की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने उनकी अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई ठिकानों को जवाबी कार्रवाई में नुकसान पहुंचाया, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ा धक्का था।
सीजफायर के समझौते के बाद अमेरिका ने दावा किया था कि उसने दोनों देशों के बीच युद्धविराम स्थापित कराया है, हालांकि भारत ने इस पर आपत्ति जताई थी। डोनाल्ड ट्रंप ने भी बाद में स्वीकार किया कि उन्होंने युद्धविराम को लागू करने की कोशिश की थी, लेकिन यह उन्होंने सीधे तौर पर नहीं कराया था। इसके बावजूद, भारत ने सीजफायर की शर्तों के साथ एक और महत्वपूर्ण घोषणा की थी।
भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि अगर किसी भी प्रकार का आतंकी हमला हुआ, तो इसे युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा और इस पर तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया दी जाएगी।
भारत ने यह भी साफ किया है कि वह किसी भी तरह के न्यूक्लियर ब्लैकमेल को स्वीकार नहीं करेगा और ऐसे हमलों का जवाब सीधा और सख्त होगा। इस घोषणा के साथ ही भारत ने पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अगर कोई भी आतंकवादी गतिविधि की गई, तो भारत उसे पूरी ताकत से जवाब देगा और उसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Read This Also:- पाकिस्तान का स्वर्ण मंदिर पर हमला असंभव, SGPC का सेना से अलग बयान





