संसदीय समिति के समक्ष पेश हुए वाणिज्य सचिव, बताया- कोई समझौता नहीं हुआ
सूत्रों के मुताबिक, वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने संसदीय समिति को स्पष्ट किया कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार शुल्क को लेकर कोई आधिकारिक समझौता नहीं हुआ है। समिति के सदस्यों ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत आयात शुल्क (टैरिफ) में ‘काफी कमी’ करने के लिए सहमत हो गया है। इस पर बर्थवाल ने कहा कि इन मीडिया रिपोर्टों और ट्रंप के बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत अभी भी जारी है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार किसी भी सूरत में अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था के हितों से समझौता नहीं करेगी। भारत एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता करने के पक्ष में है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूती मिलेगी। बर्थवाल ने आश्वस्त किया कि भारत की नीतियां इस तरह से तैयार की जा रही हैं, जिससे देश के उद्योगों और व्यापारिक हितों की सुरक्षा हो सके।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर क्या कहा वाणिज्य सचिव ने?
वाणिज्य सचिव ने समिति के समक्ष यह स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर सतर्क रुख अपना रहा है। उन्होंने कहा, "अमेरिका और भारत के बीच व्यापार शुल्क को लेकर अब तक कोई समझौता नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और हम भारत के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
बर्थवाल ने आगे कहा, "भारत सरकार व्यापार के क्षेत्र में उदारीकरण के पक्ष में है, लेकिन हम अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण उद्योगों के साथ समझौता नहीं कर सकते। हमारा मकसद यह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बना रहे और घरेलू उत्पादकों को नुकसान न पहुंचे।"
सांसदों ने उठाए तीखे सवाल, जानिए क्या कहा गया
बैठक के दौरान कई सांसदों ने यह सवाल उठाया कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार शुल्क को लेकर मेक्सिको और कनाडा की तरह कड़ा रुख क्यों नहीं अपना रहा है। सांसदों ने चिंता व्यक्त की कि अमेरिका बार-बार भारत पर टैरिफ कम करने का दबाव बना रहा है, लेकिन भारत सरकार इस मामले में धीमी प्रतिक्रिया क्यों दे रही है।
इस पर वाणिज्य सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के संबंधों की तुलना मेक्सिको और कनाडा से नहीं की जा सकती, क्योंकि उन दोनों देशों के साथ अमेरिका के सुरक्षा और इमिग्रेशन से जुड़े मुद्दे हैं। वहीं भारत और अमेरिका के संबंध मुख्य रूप से व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, "भारत की प्राथमिकता यह है कि किसी भी व्यापार समझौते में हमारे घरेलू उद्योगों को नुकसान न हो। हम एक पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर काम कर रहे हैं, जिससे भारत और अमेरिका दोनों को फायदा हो।"
Read This Also:- जयराम रमेश का दावा – मोदी सरकार ने ट्रंप को खुश करने के लिए की स्टारलिंक डील
Read This Also:- जयराम रमेश का दावा – मोदी सरकार ने ट्रंप को खुश करने के लिए की स्टारलिंक डील





