एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि राशिद ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह अपनी अंतरिम जमानत के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र की सेवा कैसे करेंगे, और उनके बयान में अस्पष्टता है। इसके अलावा, एनआईए ने यह भी कहा कि राशिद द्वारा किए गए कार्यों को पर्याप्त और सख्त प्रमाण के रूप में नहीं प्रस्तुत किया गया।
वहीं, राशिद इंजीनियर के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन ने तर्क किया कि उनकी जमानत याचिका पर अगस्त में सुनवाई हुई थी, लेकिन फिर अधिकार क्षेत्र के मुद्दे के कारण कोई निर्णय नहीं लिया गया।
इसके बाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल ने एनआईए कोर्ट को एमपी/एमएलए विशेष अदालत के रूप में नामित करने का अनुरोध किया था, और इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है, और उच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई 6 फरवरी के लिए निर्धारित की है। राशिद इंजीनियर को हाल ही में जम्मू और कश्मीर आतंकी फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था, जो एनआईए द्वारा जांचा जा रहा है। एनआईए के अनुसार, इस मामले में राशिद इंजीनियर के अलावा कई अन्य प्रमुख आतंकवादी नेता, जैसे हाफिज सईद, यासीन मलिक और शब्बीर शाह, शामिल हैं।
यह मामला जम्मू और कश्मीर में आतंकी फंडिंग से जुड़ा हुआ है, जहां आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद और जेकेएलएफ ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर हिंसा और अशांति फैलाने की योजना बनाई थी। एनआईए का कहना है कि इन आतंकवादी समूहों ने हवाला और अन्य गुप्त तरीकों से धन प्राप्त किया, जिसका उपयोग उन्होंने जम्मू और कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए किया।
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