परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन में स्थित परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने इस पर गंभीर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और IAEA को हर वक्त हाई अलर्ट पर रहना होगा।
IAEA प्रमुख ने चेर्नोबिल पर हुए ड्रोन हमले और ज़ापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट (Zaporizhzhia Nuclear Power Plant) के आसपास बढ़ी सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र में IAEA की एक विशेष टीम स्थिति का आकलन कर रही है।
चेर्नोबिल आपदा: 1986 की सबसे भयावह परमाणु दुर्घटना
चेर्नोबिल का नाम सुनते ही 1986 की उस भयानक परमाणु आपदा की याद ताजा हो जाती है, जिसे अब तक की सबसे बड़ी और सबसे खतरनाक परमाणु दुर्घटना माना जाता है।
26 अप्रैल 1986 को, चेर्नोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र में एक सुरक्षा परीक्षण के दौरान बिजली और भाप के अनियंत्रित निर्माण की वजह से भीषण विस्फोट हुआ। यह संयंत्र यूक्रेन और बेलारूस की सीमा के करीब स्थित था। विस्फोट इतना भयावह था कि पूरे क्षेत्र में रेडिएशन फैल गया।
इस हादसे में 31 लोगों की तुरंत मौत हो गई, जिनमें प्लांट के कर्मचारी और अग्निशामक शामिल थे। बाद में विकिरण के प्रभाव से हजारों लोगों की असमय मौत हुई। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस आपदा के कारण कैंसर और अन्य घातक बीमारियों से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या लाखों में हो सकती है।
चेर्नोबिल हमले से क्यों बढ़ी वैश्विक चिंता?
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच चेर्नोबिल पर हमला बेहद गंभीर मुद्दा बन चुका है। दुनिया पहले ही ज़ापोरिज्जिया न्यूक्लियर प्लांट के आसपास जारी सैन्य तनाव को लेकर चिंतित थी, और अब चेर्नोबिल पर हमले से खतरा और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चेर्नोबिल जैसी किसी और परमाणु साइट को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस घटना को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
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