राज्य को विशेष राज्य दर्ज़ा दिलाने की मांग
बैठक के बाद पार्टी के राज्यसभा के नेता सस्मित पात्रा ने मीडिया से कहा, “इस बार बीजद सांसद केवल मुद्दों पर बोलने तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अगर केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ओडिशा के हितों की अनदेखी करती है तो वे आंदोलन करने के लिए दृढ़ संकल्प हैं।” पात्रा ने कहा कि बीजद सांसद ओडिशा को विशेष राज्य का दर्ज़ा दिलाने कि मांग के अलावा राज्य में खराब मोबाइल कनेक्टिविटी और बैंक शाखाओं की कम संख्या का मुद्दा भी उठाएंगे।” उन्होंने कहा, “कोयला रॉयलटी में संशोधन की ओडिशा की मांग को केंद्र सरकार ने पिछले 10 वर्षों से नजरअंदाज किया है। इससे राज्य के लोगों को भारी नुकसान हो रहा है और वे अपने उचित हिस्से से वंचित हैं।”

जब पात्रा से पूछा गया कि क्या बीजद सांसद सदन में केंद्र सरकार के मुद्दों का समर्थन करेंगी, इस पर उन्होंने कहा कि अब बीजेपी का समर्थन नहीं केवल विरोध होगा। ओडिशा के हितों के लिए हम किसी भी हद तक जा सकते हैं। गौरतलब है कि बीजद ने बीते कुछ वर्षों में विभिन्न मुद्दों पर संसद में बीजेपी का समर्थन किया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को 2019 में राज्यसभा में पहुंचने में भी मदद की। बीजद के पास 9 राज्यसभा सांसद हैं, जबकि 1997 में गठन के बाद पहली बार वह लोकसभा चुनावों में कोई भी सीट जीतने में असफल रही।
ओडिशा विधानसभा की मौजूदा स्थिति
ओडिशा में लोकसभा चुनाव के साथ हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य में पहली बार शानदार जीत दर्ज़ की। 147 सीटों वाले विधानसभा में बीजेपी ने 78, बीजद ने 51, कांग्रेस ने 14 और तीन सीट अन्य ने जीती है। बीजेपी ने 24 साल से चलती आ रही बीजद की पटनायक सरकार को हराया है। बीजेपी ने मोहन चरण माझी को मुख्यमंत्री बनाया है, जो राज्य के पहले आदिवासी सीएम है। वहीं लोकसभा की बात करें तो 21 लोकसभा सीटों में से बीजद एक भी सीट नहीं जीत पाई, जबकि बीजेपी ने 20 और एक सीट कांग्रेस ने जीती हैं।





