नितेश राणे एक तेजतर्रार और विवादास्पद नेता के रूप में जाने जाते हैं, जो अपने उत्तेजक और आक्रामक बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि नितेश राणे के भड़काऊ बयानों और व्यवहार के कारण ही सोमवार को शहर में यह हिंसा भड़की। इस उपद्रव के दौरान उपद्रवियों ने कम से कम 45 वाहनों को निशाना बनाया, जिनमें तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं शामिल रहीं।
सत्तारूढ़ दल के विभिन्न प्रमुख नेताओं ने नागपुर में हुई इस हिंसक घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और यह मांग की कि इस उत्पात में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। इस बीच, जिले के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जनता को भरोसा दिलाया कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अफवाहों को फैलने से रोकने और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कड़ी नजर रखी जा रही है और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
फडणवीस सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने इस घटना को लेकर विपक्ष पर हमला बोलते हुए एक सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा, "नागपुर में हुई इस हिंसा के पीछे महा विकास अघाड़ी (एमवीए) का स्पष्ट हाथ है। विपक्षी नेता अपनी सियासी रोटियां सेंकने के लिए यह दिखाने की कोशिश में जुटे हैं कि वे ही मुसलमानों के सबसे बड़े हितैषी और समर्थक हैं, लेकिन उन्हें यह समझने की जरूरत है कि मुसलमान समुदाय ऐसा कुछ नहीं चाहता।"
शिवसेना की विधायक मनीषा कायंदे ने भी इस हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। उन्होंने कहा, "हम नागपुर में हुई इस हिंसक घटना की पुरजोर निंदा करते हैं। जो लोग अफवाहें फैलाकर माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें तुरंत जेल की सलाखों के पीछे डालकर कठोर सजा दी जानी चाहिए।
महाराष्ट्र जैसे शांतिप्रिय राज्य में इस तरह की अराजकता और हिंसा को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
नागपुर के ऐतिहासिक राजघराने के वंशज राजे मुधोजी भोसले ने इस घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा, "यह एक बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। नागपुर के सैकड़ों साल के गौरवशाली इतिहास में इस तरह की हिंसक और शर्मनाक घटना पहले कभी नहीं देखी गई। जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। साथ ही, प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।" उन्होंने अपने बयान में यह भी संदेह जताया कि इस हिंसा में स्थानीय लोग शामिल नहीं थे। उनके अनुसार, "यह संभव है कि इसमें बाहरी लोगों के साथ-साथ कुछ असामाजिक तत्वों ने मिलकर इस घटना को अंजाम दिया हो।"
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