सुमन ने महाकुंभ में मची भगदड़ का भी उल्लेख किया और कहा, "अभी हाल ही में कुंभ मेला हुआ था, जिसमें भगदड़ मचने के कारण कुछ श्रद्धालु मारे गए। इस मुश्किल समय में मुसलमानों ने अपने घरों में श्रद्धालुओं को पनाह दी और उनकी मदद की। यह एक बेहतरीन उदाहरण था कि हमारे समाज में धर्म और संस्कृति से ऊपर इंसानियत होनी चाहिए। हमें अपनी गंगा-जमुनी संस्कृति को बनाए रखना चाहिए और ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे।"
सुमन ने जोर देकर कहा कि इस तरह के आयोजनों में हम सब को एकजुट रहकर अपनी सांस्कृतिक धारा को मजबूत करना चाहिए, और किसी को भी धार्मिक उन्माद फैलाने का मौका नहीं देना चाहिए।
वहीं, इस बयान के बाद, राज्यसभा में शुक्रवार को कार्यवाही शुरू होते ही सत्तापक्ष के सदस्यों ने सुमन के राणा सांगा पर दिए गए विवादास्पद बयान को लेकर हंगामा खड़ा कर दिया।
इसके बाद, राज्यसभा की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। सुमन ने 21 मार्च को राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर बहस के दौरान राणा सांगा को लेकर कुछ विवादास्पद टिप्पणियां की थीं, जिनसे एक राजनीतिक हलचल मच गई थी।
सुमन के आवास पर तोड़फोड़ की घटना के बाद, करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने आगरा में उनके घर पर हमला किया था, जिसे लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हिंसा की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि सपा राणा सांगा की बहादुरी पर कोई सवाल नहीं उठा रही है। अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि यह हमला सुमन के 'दलित' होने के कारण हुआ था, और यह घटना समाज में असहिष्णुता और भेदभाव को उजागर करती है।
सुमन की टिप्पणी और उनके आवास पर हमले के बाद राजनीति में गर्मा-गर्मी बढ़ गई है और अब यह मामला सिर्फ एक बयानबाजी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक सौहार्द पर भी सवाल उठा रहा है। सपा नेताओं ने इसे एक राजनीतिक हमले के रूप में देखा है और इस पूरे घटनाक्रम को समाज में धर्म, जाति और राजनीति के बीच बढ़ते विवाद के रूप में देखा जा रहा है।
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