शुरुआत में सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन जैसे ही उनकी नजर गुलाबी रिबन पर पड़ी, जो लाल रिबन की जगह इस्तेमाल किया गया था, और यह देखा कि नारियल तोड़ने के लिए ईंटें भी उपलब्ध नहीं थीं, उनका गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद, उन्होंने पाया कि नींव पत्थर के पास रखे केले के पौधे की ऊंचाई भी उनके हिसाब से ठीक नहीं थी। बस, यहीं से शुरू हुआ विधायक साहब का गुस्सा।
लोगों का कहना है कि विधायक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था। गुस्से में, उन्होंने ठेकेदार के कर्मचारी सहिदुर रहमान को कॉलर से पकड़ा, उसे थप्पड़ मारा और पास में रखे केले के पौधे को उखाड़कर उससे हमला कर दिया। यह सब कुछ बेहद जल्दी हुआ, लेकिन इसका असर अब तक महसूस किया जा रहा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोगों का गुस्सा भी फूट पड़ा।
कई यूजर्स ने विधायक के इस व्यवहार को उनके सत्ता के अहंकार से जोड़ा, जबकि कुछ ने उनकी मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, "अगर जनता के सेवक इस तरह का व्यवहार करेंगे, तो हमें किस पर भरोसा करना चाहिए?"
वहीं, पीड़ित सहिदुर रहमान का कहना था, "मैं तो बस अपना काम कर रहा था, मुझे नहीं समझ आता कि विधायक साहब को इतना गुस्सा क्यों आया।" यह सवाल सिर्फ सहिदुर का नहीं, बल्कि पूरे बिलासिपारा के लोगों का है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर विधायक को इतनी छोटी बात पर इतना गुस्सा क्यों आया, और क्या यह किसी जनप्रतिनिधि के लिए उचित व्यवहार है?
घटना के बाद, सहिदुर रहमान ने उसी रात गौरीपुर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई, जिसे बाद में बिलासिपारा पुलिस स्टेशन ट्रांसफर कर दिया गया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 115(2), 8296, 352 और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
जब मामला तूल पकड़ने लगा और एफआईआर दर्ज हो गई, तो विधायक समसुल हुदा का रुख बदल गया। उन्होंने माफी मांगते हुए कहा, "मैं मानता हूं कि मुझसे गलती हुई। परिस्थितियों ने मुझे ऐसा करने पर मजबूर किया। मैं असम की जनता से माफी मांगता हूं।" हालांकि, विधायक की माफी पर अब सवाल उठ रहे हैं। क्या यह माफी सच्ची है, या यह सिर्फ जनता का गुस्सा शांत करने की कोशिश है? लोग यह सवाल कर रहे हैं कि अगर माफी मांगनी थी, तो पहले अपनी गलती क्यों नहीं मानी? और एक जनप्रतिनिधि को इतनी छोटी बातों पर क्यों गुस्सा आ जाता है?
यह पहली बार नहीं है जब कोई जनप्रतिनिधि अपने व्यवहार के कारण चर्चा में आया है, लेकिन समसुल हुदा की यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या सत्ता की कुर्सी इतनी भारी हो जाती है कि छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा फूट पड़ता है? क्या यह एक जनप्रतिनिधि का अहंकार है, जो जनता की सेवा के वादों पर भारी पड़ रहा है?
इस घटना ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या हमारे नेता वास्तव में जनता की सेवा के लिए तैयार हैं, या फिर उनका असली उद्देश्य सिर्फ अपनी पावर को बरकरार रखना और किसी भी छोटी सी बात पर प्रतिक्रिया देना है?
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विधायक समसुल हुदा को अपनी इस हरकत की कीमत चुकानी पड़ेगी, या यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा। AIUDF पहले ही कई विवादों में घिरी हुई है, और यह घटना पार्टी के लिए एक और झटका साबित हो सकती है। जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या विधायक साहब को अपनी हरकत का खामियाजा भुगतना पड़ेगा, या फिर यह मामला भी राजनीति की बिसात पर एक और दिन की चाय की बात बनकर रह जाएगा।
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