जया बच्चन ने कहा, "राष्ट्रपति के अभिभाषण में महिलाओं के सशक्तिकरण की बात की गई, जो कि स्वागत योग्य है, लेकिन हमें यह देखना होगा कि वास्तविक जीवन में महिलाओं के साथ समान और सम्मानजनक व्यवहार नहीं हो रहा है। जैसे कल उत्तर प्रदेश के चुनाव में महिलाएं मतदान केंद्रों पर लाइन में खड़ी थीं, तब उनके बुर्के को हटाकर उनकी पहचान की जा रही थी, जो एक अवैध और गलत प्रक्रिया है। यह वही स्थिति है जो दिल्ली में भी देखने को मिली, जहां बुर्का पहने हुए महिलाओं की जांच की जा रही थी, लेकिन जो महिलाएं बुर्का नहीं पहनतीं, उनके साथ कोई जांच नहीं की गई।"
महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के बारे में आगे बोलते हुए, जया बच्चन ने कहा, "मेरे परिवार में तीन बहनें हैं, और मैं सबसे बड़ी हूं। मेरी पहली संतान एक लड़की है, मेरी पहली नातिन लड़की है और मेरी पहली पोती भी लड़की है। इस कारण से मैं समझ सकती हूं कि महिलाएं अब कितनी सशक्त हो रही हैं और उन्हें उनका अधिकार मिलना चाहिए।"
इसके साथ ही उन्होंने कहा, "हमें मशहूर होने का शौक नहीं है, आप सभी पुरुष हमें जानते हैं, और यही हमारे लिए सबसे बड़ी बात है।"
अखिलेश यादव का आरोप
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा, "चुनाव आयोग को तुरंत इस पर संज्ञान लेना चाहिए कि अयोध्या में मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में पुलिस के बड़े अधिकारी मतदाताओं के आईडी कार्ड चेक कर रहे हैं। यह चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और मतदाताओं में भय उत्पन्न करने का प्रयास है, जिससे लोकतांत्रिक प्रणाली को नुकसान हो सकता है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।"
अखिलेश यादव का कहना था कि इस तरह की घटनाएं चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाती हैं और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर कोई असर न पड़े।
यह विवाद और आरोप-प्रत्यारोप से जुड़ी घटनाएं चुनाव आयोग के लिए चुनौती बन सकती हैं, और इसे सुनिश्चित करना जरूरी है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी हो।





