अखिलेश यादव ने पीडीए को गुमराह किया
बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा, “सपा मुखिया ने लोकसभा चुनाव में खासकर संविधान बचाने की आड़ में पीडीए को गुमरहा करके उनका वोट तो जरूर ले लिया, लेकिन यूपी विधानसभा में प्रतिपक्ष का नेता बनाने में जो इनकी उपेक्षा की गई, यह भी सोचने की बात है।” उन्होंने कहा कि सपा में एक जाति विशेष को छोड़कर पीडीए के लिए कोई जगह नहीं है। ब्राह्मण समाज की तो कतई नहीं क्योंकि सपा और भाजपा सरकार में जो इनका उत्पीड़न व उपेक्षा हुई है वह किसी से छिपा नहीं। वास्तव में इनका विकास और उत्थान केवल बसपा की सरकार में हुआ था। इन लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
वहीं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखिलेश यादव पर हमला बोला है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि कांग्रेस के मोहरा सपा बहादुर श्री अखिलेश यादव जी नेता प्रतिपक्ष चुनते ही असलियत सामने आ गई है। सपा में पीडीए चालीसा पढ़ने वाले पिछड़ों, दलितों के समर्थन से चुनकर आए नेताओं में नाराजगी है। भाजपा सबका साथ, सबका विकास और सबका सम्मान करती है। 2027 में 2017 दोहराया जाएगा और एक बार फिर कमल खिलेगा।
बसपा और भाजपा के इन आरोप का जवाब खुद नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने दिया। उन्होंने कहा कि पीडीए की लड़ाई जारी रहेगी। केशव प्रसाद मौर्य पर तंज कसते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “उनके लिए मानसून ऑफर अभी भी जारी है।”
कौन है माता प्रसाद पांडेय
माता प्रसाद पूर्वांचल से आते हैं, जो कि एक ब्राह्मण चेहरा है। कहा जा रहा है अखिलेश यादव ने अब पीडीए के बाद ब्राह्मण कार्ड चला है। माता प्रसाद इटावा से विधायक हैं। वह आठ बार विधायक और दो बार विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्हें विधानसभा की कार्रवाई चलने का लंबा अनुभव है। 2012 में जब अखिलेश यादव यूपी के सीएम बने थे तो माता प्रसाद को विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया था।





