पार्टी के खराब प्रदर्शन पर समीक्षा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मायावती ने लोकसभा चुनाव में ख़राब प्रदर्शन की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई थी। इस बैठक में आकाश समेत सभी राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। समीक्षा बैठक में सभी नेताओं ने आकाश को उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय संयोजक बनाने का प्रस्ताव रखा। रिपोर्टों के अनुसार समीक्षा बैठक से पहले ही कुछ उम्मीदवारों ने आकाश आनंद को चुनाव बीच बसपा के राष्ट्रीय संयोजक के पद और प्रचार अभियान से हटाने के फैसले को मुस्लिम और दलित वोटों के बसपा से सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर जाने का संभावित कारण बताया था।
पूर्ण परिपक्वता के अभाव के कारण पद से हटाया था
मायावती ने लोकसभा चुनाव के बीच आकाश में पूर्ण परिपक्वता का अभाव बताते हुए उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया था। मायावती ने पार्टी को खड़ा करने और डॉ. भीमराव आंबेडकर के स्वाभिमान को बचाने के लिए अपनी और कांशीराम की मेहनत का हवाला दिया था। उन्होंने कहा है था, “इस आंदोलन को गति देने के लिए नई पीढ़ी को भी तैयार किया जा रहा है। इसी के तहत हमने आकाश को नेशनल कोऑर्डिनेटर व अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। लेकिन अब वह अपना फ़ैसला वापस ले रही हूँ।” इसके पीछे वजह उन्होंने आकाश आनंद में पूरी परिपक्वता के अभाव को बताया है।
मायावती ने आकाश पर यह करवाई उस दौरान की थी जब लोकसभा चुनाव के दौरान उनका एक भाषण सुर्खियां में था। उनके इस भाषण पर चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज़ किया था। उन्होंने यूपी के सीतापुर में बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा था कि यह बुलडोज़र और गद्दारो की सरकार हैं।
आकाश की 2017 में राजनीति में एंट्री
आकाश आनंद ने 2017 में राजनीति में एंट्री की थी। 2017 में आकाश आनंद सहारनपुर की जनसभा में मायावती के साथ दिखे थे। इसके बाद वह लगातार पार्टी में रहकर कार्य कर रहे थे। 2019 में उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया था। यह फैसला तब लिया गया जब सपा और बसपा का गठबंधन लोकसभा चुनाव के बाद टूटा। 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनाव में पहली बार आकाश आनंद का नाम स्टार प्रचारकों की लिस्ट में आया था। जून में पंजाब और उत्तराखंड में होने वाले उपचुनाव में भी आकाश का नाम स्टार प्रचारक की सूची में शामिल किया गया है।





