मौर्य ने पहले भी पत्र लिखकर आउटसोर्सिंग और संविदा मोड के माध्यम से हुई सरकारी भर्तियों की जानकारी मांगी थी। मौर्य ने यह पत्र 11 अगस्त 2023 को लिखा था, लेकिन उस दौरान विभाग ने ऐसी जानकारी देने से मना करते हुए कहा कि उनके पास इसका डेटा उपलब्ध नहीं है। हाल ही में ऐसी ही एक जानकारी मौर्य से पहले बीजेपी की सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) की नेता और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी मांगी थी, जिसमें पूछा गया था कि क्या साक्षात्कार के आधार पर आरक्षण के नियमों का पालन किया गया है या नहीं।
सरकारी नौकरियों में आउटसोर्सिंग का मतलब है की सरकारी विभागों के लिए किसी तीसरी पार्टी द्वारा कर्मचारी उपलब्ध करवाना। यह एक समझौता आधारित होता है। जबकि सरकारी नौकरियों में संविदा का मतलब है कि एक तरह की अस्थाई नौकरी, जिसमें तीसरा पक्ष यानी कोई अन्य कंपनी शामिल नहीं होती है, ऐसे लोगों की सरकार ख़ुद भर्ती करती है, जिसमें लोगों को एक निश्चित समय सीमा के लिए रखा जाता है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्या चल रहा है
22 जुलाई को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्र में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए एक बैठक बुलाई थी, जिसमें कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी प्रमुख ओपी राजभर को भी बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं पहुंचे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, 22 जुलाई को राजभर लखनऊ में मौर्य के साथ बैठक कर रहे थे। मौर्य के साथ राजभर का नाम उन नेताओं की सूची में शामिल हो चुका है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ काम कर रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि केशव मौर्य को हाईकमान की शह है जो योगी को मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहता है।
आरक्षण के नियमों का पालन न होने की आशंका
न्यूज़ वेबसाइट द प्रिंट की ख़बर के अनुसार, नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के एक अधिकारी ने बताया है कि सभी भर्तियों में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया है। नियमों का पालन न होने का एक सबसे बड़ा कारण यह है कि जब किसी भर्ती के लिए आउटसोर्सिंग की जाती है तो संबंधित कंपनी अपने नियमों के हिसाब से भर्ती करती है।
क्या है संविदा और आउटसोर्सिंग में भर्तियों के नियम
23 जनवरी 2008 को जारी किए गए नियमों के अनुसार, संविदा और आउटसोर्सिंग की भर्तियों में 27 फ़ीसदी ओबीसी वर्ग, 21 फ़ीसदी अनुसूचित जाति वर्ग और 2 फ़ीसदी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित किया गया हैं। आरक्षण की यह व्यवस्था पीडब्ल्यूडी, सिंचाई, ग्रामीण विकास विभाग आदि के उन कार्यों पर लागू नहीं होगी जो पहले से ही अनुबंध के आधार पर भर्ती किए जाते रहे हैं।





