विधायक पलायन पर क्यों
अजित पवार की एनसीपी का लोकसभा के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा है। क़यास लगाये जा रहे थे अजित पवार लोकसभा के चुनावों में जीत कर पार्टी में अपने नेतृत्व को और मज़बूत करना चाहते थे, लेकिन चुनाव में अजित पवार को निराशा हाथ लगी। पार्टी ने चार लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक ही सीट पर जीत दर्ज़ कर पायी। अजित पवार को पारिवारिक गढ़ बारामती से भी हार का सामना करना पड़ा है। बारामती से अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने 1 लाख़ 58 हजार वोट से हरा दियाा है। ख़बर है कि पार्टी के प्रदर्शन और ख़राब नेतृत्व के चलते कई विधायक वापिस शरद पवार की पार्टी से जुड़ना चाहते हैं।
शरद पवार वाली एनसीपी ने 10 सीटों पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था, जिसमें से 8 सीटों पर जीत हासिल हुई। चुनावों के दौरान जनता ने शरद पवार के प्रति सहानुभूति भी दिखायी थी। शरद पवार ने यह साफ़ कर दिया है कि अब भी महाराष्ट्र के पश्चिमी भाग में एनसीपी-एसपी को कोई नहीं हरा सकता है। शरद पवार की जीत ने एक-बार फिर पार्टी और कार्यकर्ताओं के अंदर उत्साह भर दिया है।
रोहित पवार ने पत्रकारों से कहा कि जो विधायक उनके साथ आना चाहते है, वे अभी इसलिए नहीं आ रहे हैं क्योंकि उन्हें मानसून सत्र के दौरान अपने क्षेत्र के विकास के लिए निधि प्राप्त करनी है। इसलिए वे सभी सत्र समाप्त होने तक इंतज़ार करेंगे।
जुलाई 2023 में एनसीपी का विभाजन
महाराष्ट्र में अविभाजित एनसीपी ने 2019 के विधानसभा चुनाव में 288 सीटों में से 54 सीटों पर जीत दर्ज़ की थी। 2023 में जब पार्टी विभाजित हुई तो अजित पवार ने 40 विधायकों के समर्थन होने की बात कही थी। परिणामस्वरूप एनसीपी दो भागों में विभाजित हो चुकी है। पुरानी एनसीपी अजित पवार के खेमें में गयी है, जबकि शरद ने एनसीपी (एसपी) के नाम से नयी पार्टी का गठन किया।





