NPP ने लिया समर्थन वापस
मणिपुर में हिंसा के बीच रविवार को राज्य सरकार की आलोचना करते हुए NPP ने राज्य सरकार से समर्थन वापस ले लिया। NPP के राज्य में सात विधायक हैं। पार्टी ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर यह जानकारी दी कि राज्य में हिंसा रोकने में नाकाम सरकार से समर्थन वापस ले रहे हैं। पत्र में लिखा गया है कि मुख्यमंत्री बीरेन सिंह हिंसा को रोकने और राज्य की सामान्य स्थिति बहाल करने में विफल रहे। इससे पहले मणिपुर हिंसा को लेकर कुकी पीपुल्स अलायंस(KPA) ने भी सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। इस पूरे मामले को लेकर मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष मेघा चंद्र ने कहा कि मणिपुर के लोग शांति चाहते है, इसके लिए राज्य में नई सरकार का बनना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस के सभी विधायकों के साथ इस्तीफा देने को तैयार हैं।
राज्य के पांच जिलों में कर्फ्यू
मणिपुर में हिंसा इतनी बढ़ चुकी है कि शनिवार को मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और 10 विधायकों के घर पर हमले किए गए। जिसके बाद राज्य के पांच जिलों में कर्फ्यू और सात जिलों में इंटरनेट भी बंद कर दिया गया। इन सब के बीच बीजेपी के 19 विधायकों ने मुख्यमंत्री बीरेन सिंह को हटाने की मांग को लेकर PMO को पत्र लिखा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार खबर यह भी चल रही है कि अगर मणिपुर में दो से तीन दिन में हालात नहीं सुधरे तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। इसके अलावा राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम(AFSPA) हटाने की मांग की है।
विपक्ष ने मोदी को घेरा
मणिपुर हिंसा को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि मणिपुर में हाल ही में हुई हिंसक झड़प विचलित करने वाली हैं। एक साल से ज्यादा हो गया है। हर भारतीय चाहता है कि केंद्र और राज्य सरकारें हिंसा खत्म करने की कोशिश करें। राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी को मणिपुर जाने और क्षेत्र में शांति और सुधार की दिशा में काम करने की मांग की। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मणिपुर में उनकी(बीजेपी) की डबल इंजन सरकार है। लेकिन ना मणिपुर एक है, ना सेफ है। मई 2023 से मणिपुर अकल्पनीय दर्द, विभाजन और बढ़ती हिंसा से गुजर रहा है। जिससे मणिपुर का भविष्य संकट में है।





