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Manipur: एन बीरेन सिंह ने छोड़ा मुख्यमंत्री पद, 21 महीने से चल रही हिंसा के बीच दिया इस्तीफ़ा

मुख्यमंत्री ने कहा था, "मैं मणिपुर के लोगों से माफी मांगता हूं। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, कई लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। यह मेरे लिए अत्यंत |

Manipur: एन बीरेन सिंह ने छोड़ा मुख्यमंत्री पद, 21 महीने से चल रही हिंसा के बीच दिया इस्तीफ़ा
फोटो: N Biren Singh , Chief Minister
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार शाम अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को अपना इस्तीफा सौंपा, हालांकि राज्यपाल ने उन्हें नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति तक पद संभालने के लिए कहा है। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब राज्य में बीते साल से जातीय हिंसा जारी है और मुख्यमंत्री को भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा था। पिछले साल के अंत में बीरेन सिंह ने राज्य में जारी हिंसा को लेकर जनता से माफी मांगी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि पूरा वर्ष बेहद कठिन रहा और तीन मई 2023 से लेकर अब तक हुई घटनाओं के लिए उन्होंने गहरा खेद व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा था, "मैं मणिपुर के लोगों से माफी मांगता हूं। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, कई लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। यह मेरे लिए अत्यंत दुखद रहा। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में राज्य में शांति बहाल होते देख मुझे उम्मीद है कि 2025 तक हालात पूरी तरह सामान्य हो जाएंगे।"

इस्तीफे में बीरेन सिंह ने केंद्र सरकार के समर्थन को सराहा


राज्यपाल को सौंपे अपने त्याग पत्र में बीरेन सिंह ने मणिपुर के लोगों की सेवा को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने केंद्र सरकार को भी धन्यवाद देते हुए कहा कि उसने समय पर हस्तक्षेप करके राज्य में विकास परियोजनाओं और शांति बहाली की दिशा में काम किया। साथ ही, उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उठाए, जिन पर केंद्र सरकार का ध्यान बनाए रखने की अपील की। इनमें मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना, सीमा पर घुसपैठ रोकना, अवैध प्रवासियों के खिलाफ ठोस नीति बनाना, नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाना और बॉर्डर सिक्योरिटी को मजबूत करने जैसे मुद्दे शामिल थे।

विधानसभा सत्र रद्द, राज्य में अनिश्चितता बरकरार


इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद मणिपुर सरकार ने 12वीं विधानसभा के सातवें सत्र को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया। विधानसभा सचिव के. मेघजीत सिंह द्वारा जारी नोटिस में बताया गया कि राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह सत्र रद्द कर दिया है। 

मई 2023 से मणिपुर जातीय हिंसा की चपेट में है, जिसमें अब तक 200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हजारों परिवार विस्थापित हो चुके हैं। नवंबर में जिरीबाम में तीन महिलाओं और उनके तीन बच्चों की हत्या के बाद हालात और बिगड़ गए थे। लगातार हो रही हिंसा और बिगड़ते हालात के चलते बीरेन सिंह पर इस्तीफे का दबाव बढ़ता गया। एनडीए की सहयोगी पार्टी एनपीपी (नेशनल पीपुल्स पार्टी) ने भी सरकार से समर्थन वापस ले लिया और नेतृत्व परिवर्तन की मांग की थी।

मणिपुर में हिंसा की शुरुआत पिछले साल तीन मई को तब हुई, जब मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को मणिपुरी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया। इस फैसले के खिलाफ आदिवासी छात्रों के संगठन (ATSUM) ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद मैतेई और कुकी समुदायों के बीच झड़पें शुरू हो गईं। हालात इतने बिगड़े कि केंद्र सरकार को अर्धसैनिक बलों को तैनात करना पड़ा। बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद अब मणिपुर में नया नेतृत्व कौन संभालेगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। राज्य में शांति बहाल करने और राजनीतिक स्थिरता लाने के लिए आने वाले दिनों में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

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