जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से यह भी घोषणा की गई कि संगठन पूरे देश में एक करोड़ लोगों से समर्थन जुटाने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। चौधरी ने आरोप लगाया कि वक्फ कानून को बदलकर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कानून आरएसएस और बीजेपी की साजिश है, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ है।
इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यह तय नहीं कर सकतीं कि कोई कानून संवैधानिक है या नहीं। उन्होंने कहा कि वक्फ बिल अब संसद द्वारा पारित होकर कानून बन चुका है और उसे हर नागरिक को मानना होगा।
इस बीच कोलकाता से वायरल हो रहे एक वीडियो ने भी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है।
वीडियो में एक बस पर भगवा झंडा लगा हुआ दिखता है, जिसे एक उग्र भीड़ द्वारा घेरकर हटवाया जा रहा है। इस घटना को लेकर बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष ने ममता बनर्जी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिकारी ने कहा कि यह दृश्य भारत के मूल्यों और विवेकानंद की भूमि के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं दिलीप घोष ने तंज कसते हुए कहा कि जहां एक तरफ फिलिस्तीन और हमास के झंडे लहराए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ हिन्दू पर्वों पर भगवा झंडा फहराना अपराध माना जा रहा है।
इस पूरे विवाद ने बंगाल की राजनीति को गर्मा दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गहराता दिख सकता है। मुस्लिम संगठनों का विरोध और बीजेपी की प्रतिक्रिया राज्य में धार्मिक और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।





