राज्य के पूर्व मंत्री ने कहा, "वर्ष की शुरुआत में जब मैं राज्यसभा जाना चाहता था, तब मुझे विधानसभा चुनाव लड़ने को कहा गया। अब आठ दिन पहले राज्यसभा की सदस्यता का प्रस्ताव आया, लेकिन मैंने मना कर दिया। मैंने स्पष्ट किया कि एक-दो साल बाद इस पर विचार कर सकता हूं, अभी नहीं।"
भुजबल ने बताया कि मंत्रिमंडल में जगह न मिलने के बाद से उनकी राकांपा प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार से कोई बातचीत नहीं हुई है। प्रमुख ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) नेता भुजबल का कहना है कि उन्हें मंत्रिमंडल से इसलिए बाहर रखा गया क्योंकि उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे का विरोध किया था, जो नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय को आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "जब मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की मांग कर रहे थे, तब मैंने अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों की रक्षा की। लाडकी बहिन योजना और ओबीसी के समर्थन से ही महायुति को चुनाव में जीत मिली।"
सोमवार को नागपुर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद नासिक जाते समय भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर भुजबल ने कहा, "देखते हैं। जहां नहीं चैन, वहां नहीं रहना।" पूर्व खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने स्वीकार किया कि नए मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने से वे निराश हैं।
उन्होंने कहा, "मैं एक साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता हूं। मुझे दरकिनार किया जाए या सम्मानित, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।" राकांपा नेता ने जोड़ा, "मंत्रिपद आते-जाते रहते हैं, लेकिन मुझे मिटाया नहीं जा सकता।"
देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में रविवार को महायुति के सहयोगी दल - भाजपा (भारतीय जनता पार्टी), शिवसेना और राकांपा के 39 विधायकों ने शपथ ली। इस विस्तार में 10 पूर्व मंत्रियों को हटाकर 16 नए चेहरों को शामिल किया गया।
मंत्रिमंडल से बाहर किए गए प्रमुख नेताओं में राकांपा से भुजबल और दिलीप वाल्से पाटिल तथा भाजपा से सुधीर मुनगंटीवार और विजयकुमार गावित शामिल हैं।





