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Maharashtra: मंत्रियों पर लगे आरोपों से महायुति में घमासान, अजित पवार पर दबाव बढ़ा

महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार इन दिनों गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली यह सरकार लगातार विवादों में घिरती जा |

Maharashtra: मंत्रियों पर लगे आरोपों से महायुति में घमासान, अजित पवार पर दबाव बढ़ा
फोटो: Ajit Pawar,
महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार इन दिनों गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली यह सरकार लगातार विवादों में घिरती जा रही है, खासकर महायुति के मंत्रियों पर लग रहे आरोपों के कारण। इन आरोपों ने सरकार की स्थिरता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और आगामी बजट सत्र से पहले विपक्ष को आक्रामक बना दिया है।

विशेष रूप से डिप्टी सीएम अजित पवार की पार्टी एनसीपी के दो प्रमुख नेताओं के खिलाफ हाल ही में गंभीर मामले सामने आए हैं। इनमें से एक मामले में कोर्ट ने मंत्री को दो साल की सजा तक सुना दी है, जिससे महायुति सरकार के लिए स्थिति और पेचीदा हो गई है। विपक्ष ने इन दोनों नेताओं को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग तेज कर दी है और इसे लेकर देवेंद्र फडणवीस पर जबरदस्त दबाव बनाया जा रहा है।

किन दो मंत्रियों पर लगे हैं गंभीर आरोप?


मामले की शुरुआत एनसीपी नेता धनंजय मुंडे से जुड़ी घटनाओं से हुई। बीड़ जिले में एक सरपंच की हत्या के मामले में मुंडे के करीबी वाल्मिक करड को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी के बाद धनंजय मुंडे पर भी सवाल उठने लगे हैं और उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। दूसरा मामला राज्य के कृषि मंत्री और एनसीपी नेता माणिकराव कोकाटे से जुड़ा है, जिन्हें 30 साल पुराने धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार दिया गया है। कोर्ट ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई है। यह फैसला महायुति सरकार के लिए एक नई मुसीबत बनकर सामने आया है, क्योंकि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो वह अपने पद पर बने नहीं रह सकते। ऐसे में कोकाटे का मंत्री पद पर बने रहना कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टि से मुश्किल हो सकता है।

क्या फडणवीस लेंगे बड़ा फैसला?


अब सवाल यह उठता है कि क्या मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इन दोनों नेताओं को कैबिनेट से हटाने का फैसला लेंगे? यदि उन्हें हटाया जाता है, तो महायुति में संतुलन बनाए रखना भी एक चुनौती होगी। गठबंधन सरकार में कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले सभी सहयोगियों से विचार-विमर्श जरूरी होता है, जिससे यह मामला और उलझता नजर आ रहा है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए बयान में कहा कि किसी भी मंत्री पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, क्योंकि अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री को ही लेना है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि इस तरह के मामले सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि यह गठबंधन की सरकार है, इसलिए किसी भी फैसले से पहले सभी सहयोगी दलों से राय ली जाएगी।

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