विपक्ष ने लगाया था आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर रश्मि शुक्ला को हटाने की मांग की थी। नाना पटोले ने पत्र में कहा था कि रश्मि शुक्ला एक विवादित अधिकारी हैं। पटोले ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई मौके पर बीजेपी का पक्ष लिया है। उनके पद पर रहने से पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने पर संदेह पैदा होगा और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठेंगे।
दो दिन पहले शनिवार को शिवसेना(UBT) नेता संजय राउत ने भी रश्मि शुक्ला पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि वह खुलेआम भाजपा के लिए काम करती हैं। संजय ने दावा किया था कि राज्य की पुलिस दबाव में काम कर रही है। विपक्ष के कार्यकर्ताओं पर जबरन केस दर्ज किये जा रहे हैं। फर्जी आधार कार्ड के जरिए मतदाता सूची में धांधली की जा रही है। शिवसेना(UBT) नेता ने कहा था कि रश्मि शुक्ला पर कई गंभीर आरोप हैं। इसलिए उनके खिलाफ एक्शन लिया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने जताई थी चिंता
पिछले सप्ताह ही चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र में राजनीति से जुड़े अपराधों को लेकर चिंता जताई थी। आयोग ने कहा था कि इससे चुनाव का माहौल खराब होने की संभावना है। आयोग ने रश्मि शुक्ला को निर्देश दिए थे कि इस पर रोक लगाई जाए। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो विपक्ष ने चुनाव आयोग से शिकायत की और अब आयोग ने यह एक्शन लिया है।
इसके अलावा रश्मि शुक्ला से कई विवाद जुड़े रहे हैं। 1988 बैच की IPS अधिकारी रश्मि शुक्ला जब महाराष्ट्र में इंटेलिजेंस कमिश्नर थी, उस दौरान भी उन पर फ़ोन टैपिंग के आदेश का आरोप लगा था। वहीं विपक्ष भी उन्हें भाजपा का करीबी बता रहा है। रश्मि शुक्ला को जून 2024 में ही रिटायर होना था, लेकिन उन्हें 2 साल का सेवा विस्तार और मिल गया। जिसके बाद भाजपा के साथ उनकी करीबी ने और जोर पकड़ लिया। रश्मि शुक्ला पुणे की पुलिस कमिश्नर भी रही हैं। वह महाराष्ट्र की पहली महिला DGP हैं। रश्मि शुक्ला सशस्त्र सीमा बल(SSB) की महानिदेशक भी रह चुकी है। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान रश्मि शुक्ला खुफिया विभाग की प्रमुख थीं।





