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Mahakumbh 2025: प्रयागराज महाकुंभ में मुलायम सिंह यादव की मूर्ति पर विवाद, हिंदू संतों ने जताई आपत्ति

प्रयागराज की संगम नगरी में आज से महाकुंभ मेला शुरू हो रहा है, जो 13 जनवरी से 26 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। यह महाकुंभ मेला एक धार्मिक और आस्था का पर्व है,

Mahakumbh 2025: प्रयागराज महाकुंभ में मुलायम सिंह यादव की मूर्ति पर विवाद, हिंदू संतों ने जताई आपत्ति
फोटो: Mulayam Singh Yadav, Prayagraj , Mahakumbh
प्रयागराज की संगम नगरी में आज से महाकुंभ मेला शुरू हो रहा है, जो 13 जनवरी से 26 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। यह महाकुंभ मेला एक धार्मिक और आस्था का पर्व है, जिसमें हर साल लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए संगम में आते हैं। इस अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का जुटना अनुमानित है, जो विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और संगम के पवित्र जल में स्नान करेंगे। हालांकि, इस बार महाकुंभ मेला परिसर में एक नया विवाद उभर कर सामने आया है, जब एक शिविर में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की मूर्ति स्थापित की गई। इस मूर्ति को लेकर हिंदू संतों के बीच गहरी नाराजगी और आपत्ति देखने को मिली है।

 अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और कई प्रमुख हिंदू संतों ने इस मूर्ति की स्थापना को लेकर तीव्र विरोध जताया है। उनका कहना है कि हिंदू धर्म के इस महत्वपूर्ण आस्थापूर्ण पर्व में एक ऐसे नेता की मूर्ति स्थापित करना, जो हिंदू विरोधी विचार रखते थे, यह हिंदू समाज का अपमान है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने हमेशा हिंदू विरोधी और सनातन विरोधी दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया था। उनका यह भी कहना था कि मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा स्थापित करने का उद्देश्य उन घटनाओं को याद दिलाना है, जब उनके समर्थकों ने हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा और दमन का सहारा लिया था। महंत रवींद्र पुरी ने यह स्पष्ट किया कि वे मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा पर व्यक्तिगत रूप से कोई आपत्ति नहीं रखते हैं, क्योंकि वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे, लेकिन सवाल यह उठता है कि वर्तमान समय में उनकी प्रतिमा स्थापित करने से क्या संदेश दिया जा रहा है। 

खासकर, जब हम राम मंदिर आंदोलन और हिंदू धार्मिक मुद्दों पर उनके द्वारा अपनाए गए रुख को ध्यान में रखते हैं, तो इस प्रतिमा की स्थापना से समाज में असंतोष का माहौल बनना स्वाभाविक है। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद ने भी महंत रवींद्र पुरी के विचारों का समर्थन किया और कहा कि मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक और धार्मिक इतिहास हिंदू समाज के खिलाफ था। उनका यह मानना था कि एक धार्मिक आयोजन में ऐसे व्यक्ति की मूर्ति की स्थापना धार्मिक संवेदनाओं को ठेस पहुंचा सकती है। वहीं, उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे ने इस मुद्दे को लेकर अधिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शनिवार को कुंभ मेला परिसर में मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की दो से तीन फीट ऊंची मूर्ति का अनावरण किया। उनका कहना था कि इस शिविर का उद्देश्य मुलायम सिंह यादव के विचारों और उनके योगदान को बढ़ावा देना है, और यह शिविर तीर्थयात्रियों और अन्य लोगों के लिए भोजन और विश्राम की व्यवस्था भी करेगा। 

वे यह भी स्पष्ट कर चुके थे कि महाकुंभ के बाद इस मूर्ति को समाजवादी पार्टी के कार्यालय में स्थापित कर दिया जाएगा। मुलायम सिंह यादव, जो समाजवादी पार्टी के संस्थापक थे, तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे। उनके राजनीतिक करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए, और वे 10 बार विधायक और 7 बार सांसद चुने गए थे। उन्होंने मैनपुरी और आजमगढ़ जैसे महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया था। 10 अक्टूबर 2022 को उनका निधन हो गया था, और उनके निधन के बाद उनके समर्थकों और पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। 

 इस विवाद ने महाकुंभ मेला के शांति और धार्मिक आयोजन को प्रभावित किया है, और यह दिखाता है कि धर्म और राजनीति के बीच की सीमा कभी-कभी बहुत पतली हो सकती है।

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