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Mahakumbh 2025: अखिलेश का BJP को तंज- ‘महाकुंभ को खेल न समझे योगी सरकार’, उपमुख्यमंत्री ने किया पलटवार

महाकुंभ-2025 में आस्था के प्रतीक संगम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। हजारों लोग यहां आकर पवित्र नदियों में डुबकी लगा रहे हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित कर |

Mahakumbh 2025: अखिलेश का BJP को तंज- ‘महाकुंभ को खेल न समझे योगी सरकार’, उपमुख्यमंत्री ने किया पलटवार
फोटो: MahaKumbh, CM Yogi, Uttar Pradesh, Akhilesh
महाकुंभ-2025 में आस्था के प्रतीक संगम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। हजारों लोग यहां आकर पवित्र नदियों में डुबकी लगा रहे हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं। इस दौरान, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का संगम में स्नान करना भी चर्चा का विषय बन गया है। रविवार को अखिलेश यादव अपने बेटे अर्जुन यादव के साथ संगम में 11 डुबकियां लगाई थीं। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए इस धार्मिक आयोजन को लेकर अपनी बात रखी और कहा कि जो लोग वर्तमान सरकार में हैं, उन्हें इस आयोजन को एक खेल आयोजन की तरह नहीं पेश करना चाहिए। उनका यह बयान प्रदेश की राजनीति में तूल पकड़ गया है, और राजनीतिक समीक्षकों ने इसे लेकर कई तरह के तर्क दिए हैं। इस बयान के बाद, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पलटवार करते हुए अखिलेश यादव की आलोचना की। 

एएनआई से बातचीत में ब्रजेश पाठक ने कहा, "जब अखिलेश यादव महाकुंभ क्षेत्र में स्नान करने आए थे, तो हम सभी को खुशी हुई और उनका स्वागत किया। लेकिन अगर वे कहते हैं कि प्रयागराज में कैबिनेट बैठक को राजनीतिक आयोजन माना जाना चाहिए, तो फिर सवाल यह उठता है कि क्या मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा स्थापित करने की योजना भी राजनीति नहीं है? क्या यह राजनीतिकरण नहीं है? भारतीय राजनीति में इस तरह की दोहरी नीति को लोग स्वीकार नहीं करते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव को अपनी राजनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए और अपनी गिरेबान में झांककर देखना चाहिए। अखिलेश यादव ने संगम स्नान के बाद महाकुंभ के सेक्टर 16 में स्थित शिविर में पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए थे।

 इस पर जब विवाद हुआ, तो अखिलेश ने अपनी बात रखते हुए कहा, "यहां तो प्रयागराज विकास प्राधिकरण की होर्डिंग लगी हुई है। तो क्या इसे भी राजनीतिक माना जाएगा? जब लोग सेवा कर रहे हैं, तो उसे किस नजरिए से देखना चाहिए?" उन्होंने आगे कहा, "शिविर में मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा के पास जो सेवा हो रही है, वह एक बहुत बड़ी सेवा है। दूध दान से बड़ा क्या हो सकता है?" अखिलेश यादव ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए यह भी कहा कि प्रदेश सरकार को मेला क्षेत्र की जमीन दे देनी चाहिए, ताकि कुम्भ का आयोजन और भी बेहतर तरीके से किया जा सके। इस दौरान, उन्होंने गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर संगम में डुबकी लगाने के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने 11 डुबकियां त्रिवेणी, आत्म-ध्यान, सर्वकल्याण, समाज के उत्थान, सम्मान, समाधान, प्रेम और देश की एकता के प्रतीक के रूप में लगाई। 

 अखिलेश ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार को 2013 में कुम्भ का आयोजन करने का अवसर मिला था, और उस समय के आयोजन को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी जैसी प्रतिष्ठित संस्था ने सराहा था, जबकि उस समय संसाधन बहुत कम थे। इस प्रकार, उन्होंने दावा किया कि उनके नेतृत्व में हुआ कुम्भ आयोजन पहले भी सफल और शानदार था, और वह इस आयोजन को लेकर सरकार के रवैये पर सवाल उठा रहे थे। महाकुंभ-2025 के आयोजन को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अपनी-अपनी राय रख रहे हैं, लेकिन अखिलेश यादव ने जो बयान दिया है, उसने इस धार्मिक आयोजन को राजनीतिक रंग दे दिया है और इस पर सियासी बयानबाजी जारी है।

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