भाजपा में चल रही थी नाराजगी
मीडिया रिपोर्ट में यह भी चर्चा है कि अग्निवीर समेत विभिन्न योजनाओं और मुद्दों पर उन्होंने सवाल उठाए थे, जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग थे, इसलिए भी उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। दरअसल, उन्होंने कई मौकों पर पार्टी नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं से परामर्श किए बिना बयान जारी किए। इस कारण पार्टी और उसके घटक दल भाजपा में नाराजगी चल रही थी। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो विपक्षी नेताओं के साथ मीटिंग, अग्निवीर योजना समेत कई मुद्दों पर विरोध करना केसी त्यागी को भारी पड़ा है। उनके बयानों के कारण सिर्फ जेडीयू ही नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर भी मतभेद की खबरें सामने आईं।

केंद्र सरकार पर बोला था हमला
मतभेद का हालिया मामला 25 अगस्त को आया। दरअसल, 25 अगस्त को दिल्ली में फिलिस्तीन नेता मोहम्मद मकरम बलावी से विपक्षी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की थी। उस समय विपक्षी सांसदों के साथ केसी त्यागी भी दिखे थे। उन्होंने इजराइल को हथियार की आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार पर हमला बोला था। त्यागी ने कहा था कि केंद्र सरकार को इजराइल की मदद नहीं करना चाहिए और हमास के खिलाफ युद्ध के लिए भारत द्वारा इजराइल की सेना को दी जाने वाली मदद पर भी रोक लगानी चाहिए। साथ ही उन्होंने विपक्षी नेताओं के साझा बयान पर हस्ताक्षर भी किया था। इसी घटना के बाद से ही जेडीयू और एनडीए के कई नेता नाराज थे।
हालांकि, यह पहली बार नहीं था कि त्यागी ने केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध किया हो। इससे पहले भी वह कई मुद्दे पर सरकार की आलोचना कर चुके हैं। चार जून को आए लोकसभा चुनाव के नतीजे के तीन बाद ही उन्होंने केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना का विरोध किया था। इस योजना को लेकर उन्होंने कहा था कि सरकार को योजना पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि इस कारण युवाओं में नाराजगी है, जिसका असर लोकसभा चुनाव के परिणामों में दिखा।
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही उन्होंने कहा था कि इंडिया गठबंधन ने नीतीश कुमार को पीएम पद का ऑफर दिया था। लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। त्यागी के इस बयान को लेकर भी काफी राजनीति हुई थी। इसके अलावा उन्होंने लैटरल एंट्री, यूनिफॉर्म सिविल कोड, वक्फ बोर्ड संशोधन और एससी-एसटी के आरक्षण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भी पार्टी लाइन से हटकर बयान जारी करे थे।





