मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जाने के बाद, जब विधायक टी ब्रेक पर थीं, उन्हें धीरज चड्ढा ने फोन किया। इस दौरान उन्होंने विधायक को अलाव जलवाने को लेकर धमकाया और कहा कि वह विधायक हैं, तो उन्हें कम से कम अपने क्षेत्र में अलाव जलवाना चाहिए। इसके बाद शाम को एक और कॉल किया गया, जिसमें उन्होंने नसीम सोलंकी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर अभद्र टिप्पणियां कीं।
सपा विधायक नसीम सोलंकी ने इस पूरे मामले की जानकारी कानपुर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार को दी और पुलिस की मदद लेने के लिए अपने अधिवक्ताओं से भी परामर्श किया है। वह इस घटना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रही हैं।
यह कोई पहला मौका नहीं था जब धीरज चड्ढा ने नसीम सोलंकी से अभद्र भाषा में बात की थी। इससे पहले भी चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने मंदिर में जाकर जल चढ़ाने के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दायर किया था। अब, बुधवार को, दो बार फोन करके उन्होंने विधायक को धमकाया। जब नसीम सोलंकी ने उन्हें पूछा कि वह बार-बार क्यों फोन कर रहे हैं, तो धीरज ने जवाब दिया कि वह 500 बार फोन करेंगे, जिससे यह स्थिति और बिगड़ गई।
इस पूरी बातचीत का ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें धीरज चड्ढा ने नसीम सोलंकी को अपशब्द कहे और आरोप लगाया कि विधायक निधि का पैसा वह अपने घर में अलाव जलाने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।
हालांकि, नसीम सोलंकी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यदि धीरज को कोई समस्या है, तो वह उसे हल करने के लिए तैयार हैं और उन्हें अपनी जगह पर अलाव जलवाने का प्रस्ताव भी दिया।
इस मामले में भाजपा के कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी ने स्पष्ट किया कि धीरज चड्ढा भाजपा के सदस्य नहीं हैं और न ही उन्होंने कभी पार्टी के किसी पद पर कार्य किया है। वहीं, भाजपा के जिलाध्यक्ष दीपू पांडेय ने भी धीरज चड्ढा के भाजपा से संबंधों को नकारते हुए कहा कि वह पार्टी के सक्रिय सदस्य नहीं हैं।
इसके अलावा, वे कभी भी भाजपा की मुख्य कमेटी या किसी अन्य महत्वपूर्ण पद पर नहीं रहे हैं।
अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था हरीश चन्दर ने इस मामले की जानकारी दी और कहा कि यह मामला अब एडीसीपी राजेश श्रीवास्तव को सौंप दिया गया है। पुलिस इस मामले की पूरी जांच कर रही है और तहरीर मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे विवाद ने न केवल कानपुर बल्कि पूरे राज्य में राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है, और अब यह देखना होगा कि कानूनी कार्रवाई के बाद क्या परिणाम सामने आते हैं।
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