हालांकि, जस्टिस यादव ने इस निर्णय के पीछे का कोई खास कारण नहीं बताया।
इस स्थिति पर जस्टिस शेखर यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी प्रतिक्रिया दी और खबरों का खंडन किया। उन्होंने बताया कि जो पोस्टर और विज्ञापन प्रकाशित हुए हैं, जिनमें उनका नाम मुख्य वक्ता के रूप में दिखाया गया है, वे पूरी तरह से गलत हैं। उन्होंने इसे एक फर्जी खबर करार दिया और कहा कि किसी ने उनका नाम गलत तरीके से इस्तेमाल किया है। जस्टिस यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस सेमिनार में शामिल नहीं होंगे, और यह उनके बारे में फैलाए जा रहे झूठ का परिणाम है।
यह विवाद पिछले साल दिसंबर में तब उत्पन्न हुआ था, जब जस्टिस शेखर यादव ने उच्च न्यायालय परिसर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) विधिक प्रकोष्ठ के प्रांतीय सम्मेलन में संबोधन करते हुए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के बारे में बयान दिया था। इस बयान के बाद उनकी टिप्पणियां राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विवादास्पद हो गईं।
उनके इस बयान को लेकर विपक्षी नेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे घृणास्पद भाषण करार दिया। इस विवाद के बाद 10 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने जस्टिस यादव के बयानों पर ध्यान केंद्रित करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय से इस पर रिपोर्ट मांगी थी।
22 जनवरी को आयोजित होने वाले इस सेमिनार में कई अन्य प्रमुख वक्ताओं ने भाग लेने की पुष्टि की है। इनमें विहिप के काशी प्रांत के अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी केपी सिंह, आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक अशोक बेरी, विहिप के वरिष्ठ नेता बड़े दिनेश जी, प्रसिद्ध इतिहासकार संजय कुमार सिंह और भारत विकास परिषद के संगठन सचिव विक्रांत कंडेलवाल शामिल हैं।
इस आयोजन में गोरक्षपीठ के पूर्व महंत दिग्विजयनाथ और अवैद्यनाथ की भूमिका पर आधारित एक 23 मिनट की डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की जाएगी।
कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य राम मंदिर आंदोलन की ऐतिहासिक यात्रा पर चर्चा करना है और गोरक्षपीठ की इसमें भूमिका का विश्लेषण करना है। इसके अलावा, 1949 से लेकर आज तक इस आंदोलन के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया जाएगा। इस आयोजन में निरंजनी अखाड़ा पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कैलाशानंद गिरि के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसका जिक्र कार्यक्रम के ई-ब्रोशर में भी किया गया है।
यह सेमिनार विशेष रूप से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रकाश डालेगा और गोरक्षपीठ की भूमिका को विस्तार से समझाएगा। आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होगा, जिसमें राम मंदिर आंदोलन की यात्रा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
Read This Also:- LJP ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए BJP के नेता दीपक तंवर को दी टिकट, एक ही टिकट पर लड़ रही है चुनाव
Read This Also:- LJP ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए BJP के नेता दीपक तंवर को दी टिकट, एक ही टिकट पर लड़ रही है चुनाव





