मांझी ने सवालिया अंदाज में कहा, "किस आधार पर इसे फर्जी मानते हैं? क्या वे इसे सिर्फ इसलिए नकार रहे हैं क्योंकि यह उनके विचारों से मेल नहीं खाता?" उन्होंने यह भी जोड़ा कि बिहार की जनता ने जो आंकड़े सामने रखे हैं, वह बहुत स्पष्ट हैं, और इन आंकड़ों में कोई भ्रामकता नहीं है।
यह बयान उन्होंने जहानाबाद में हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के सम्मेलन के दौरान दिया, जब मीडिया ने उनसे राहुल गांधी के जातीय सर्वे पर दिए गए बयान के बारे में सवाल पूछा। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने हाल ही में पटना में आयोजित संविधान सुरक्षा सम्मेलन में यह टिप्पणी की थी कि बिहार की जातीय जनगणना सिर्फ एक छलावा है, जो जनता से किया गया धोखा है।
इसके बाद राहुल गांधी विपक्षी नेताओं के निशाने पर आ गए थे, हालांकि कांग्रेस पार्टी उनके बचाव में उतर आई है।
जीतन राम मांझी ने अपने बयान में यह भी कहा कि जातीय जनगणना के मुद्दे पर वे खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे और प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर यह कहा था कि राज्यों को अपनी जनगणना खुद करानी चाहिए। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद देते हुए कहा कि बिहार पहला राज्य था, जिसने जातीय जनगणना करवाई।
मांझी ने आगे बताया कि इस जनगणना के आंकड़ों के आधार पर यह समझने में मदद मिली कि विभिन्न जातियों और समुदायों की जनसंख्या में कितनी वृद्धि और कमी आई है, और इसके आधार पर नीतीश कुमार ने आरक्षण का दायरा बढ़ाया, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को और अधिक लाभ मिल सके।
इसके अलावा, जीतन राम मांझी ने बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि आजकल तेजस्वी यादव को "माई-बहिन योजना" याद आ रही है, लेकिन जब वे पंद्रह साल तक राज्य सरकार में थे, तब उन्हें महिलाओं के अधिकार और उनके कल्याण के बारे में क्यों नहीं सोचा? यह सिर्फ चुनावी मौसम में उनकी एक और जुमलेबाजी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव अब सिर्फ वोटों के लिए वादे कर रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुनावों से पहले करते हैं।
जीतन राम मांझी ने कहा कि जो लोग इन योजनाओं और वादों को हवा में छोड़ते हैं, उनका असलियत से कोई लेना-देना नहीं है। असल विकास के काम पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार ही कर रहे हैं, और यही कारण है कि उनका दल एनडीए का हिस्सा बना हुआ है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पीएम मोदी और नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में विकास हो रहा है और बिहार की जनता इसे महसूस कर रही है।
इस सबके बीच, जीतन राम मांझी ने बिहार में जातीय जनगणना के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह जनगणना बिहार की सामाजिक और राजनीतिक धारा को समझने में मदद करेगी और इससे बिहार के विभिन्न वर्गों के लिए सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता आएगी। उनका कहना था कि जातीय जनगणना का यह डेटा यह तय करेगा कि किस समुदाय को अधिक आरक्षण की आवश्यकता है और किसे कम, ताकि हर वर्ग को सही तरीके से प्रतिनिधित्व मिल सके।
मांझी ने जोर दिया कि बिहार में जातीय जनगणना के आंकड़ों का सही तरीके से विश्लेषण किया जाना चाहिए, ताकि समाज में असमानता को दूर किया जा सके और विकास के रास्ते पर राज्य को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
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