AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कानून लागू होने के बाद बयान दिया कि संभल स्थित जामा मस्जिद अब वक्फ संपत्ति नहीं रहेगी। उन्होंने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में कहा:
"वक्फ अधिनियम में जो धारा 3D जोड़ी गई है, उसके अनुसार यदि कोई संपत्ति किसी पुराने अधिनियम के तहत वक्फ घोषित की गई थी लेकिन वह ASI द्वारा संरक्षित स्मारक है, तो वक्फ की घोषणा शून्य मानी जाएगी।"
ओवैसी ने दावा किया कि चूंकि संभल की मस्जिद ASI के संरक्षण में है, वह अब वक्फ की संपत्ति नहीं मानी जाएगी। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि अब मस्जिद पर ASI द्वारा संरक्षित स्मारक का बोर्ड लगा दिया गया है, और उसका नाम बदलकर "जुमा मस्जिद" कर दिया गया है।
वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन ने ओवैसी के दावे को राजनीतिक बयानबाज़ी करार देते हुए चुनौती दी। उन्होंने आजतक से बातचीत में कहा, "अगर ओवैसी साहब कहते हैं कि यह मस्जिद वक्फ संपत्ति नहीं रही, तो पहले यह बताएं कि उसका वक्फ नंबर क्या है? कब यह संपत्ति वक्फ घोषित हुई थी?"
जैन ने कहा कि धारा 3D केवल उन संपत्तियों पर लागू होती है जो ASI द्वारा संरक्षित स्मारक या क्षेत्र हैं और जिन्हें वक्फ घोषित किया गया है। ऐसी स्थिति में वक्फ की अधिसूचना अमान्य मानी जाएगी, और उस संपत्ति पर अब ASI अधिनियम, 1958 लागू होगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ASI अधिनियम धार्मिक गतिविधियों पर रोक नहीं लगाता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में कई मंदिर और मस्जिदें ASI के संरक्षण में हैं, फिर भी वहां पूजा-पाठ और नमाज़ का कार्य जारी रहता है — जैसे गोवा की सैफई मस्जिद।
देश में कई ऐतिहासिक स्थलों को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और वक्फ बोर्ड के बीच वर्षों से विवाद चला आ रहा है। वक्फ बोर्ड इन स्थलों को धार्मिक/परोपकारी संपत्ति मानता है, जबकि ASI उन्हें राष्ट्रीय धरोहर मानते हुए अपने संरक्षण में रखता है। विवाद का एक बड़ा उदाहरण ताजमहल है। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 2005 में ताजमहल को वक्फ संपत्ति घोषित किया था, यह दावा करते हुए कि यह एक मकबरा है और इस्लामी परंपरा के अनुसार वक्फ के दायरे में आता है। हालांकि, ASI इसे एक संरक्षित स्मारक मानता है और इसका प्रशासनिक नियंत्रण उसी के पास है।
Read This Also:- जामा मस्जिद से उठी आवाज़: देश पहले, मजहब बाद में





